Maharashtra Monsoon 2026: महाराष्ट्र में इस बार मानसून जहां एक ओर खेतों और जलाशयों के लिए राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर यह हजारों परिवारों के लिए बड़ी त्रासदी बन गया है. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, आकाशीय बिजली, भूस्खलन और इमारत ढहने जैसी घटनाओं ने राज्य में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. बीते 38 दिनों के भीतर बारिश से जुड़ी घटनाओं में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है और कई परिवार हमेशा के लिए उजड़ गए हैं. मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं, क्योंकि बारिश का नया दौर अब राज्य के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ने लगा है.
38 दिनों में 62 लोगों की मौत, दर्जनों घायल
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 8 जुलाई 2026 के बीच महाराष्ट्र में बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में कुल 62 लोगों की मौत हो चुकी है. इसी अवधि में 74 लोग घायल हुए हैं, जबकि लगभग 200 पशुओं की भी जान गई है. लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. कई जगह सड़कें जलमग्न हैं, बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और ग्रामीण इलाकों में लोगों का संपर्क भी टूट गया है.
ये घटनाएं बनी सबसे बड़ी वजह
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस मानसून में सबसे ज्यादा मौतें इमारत और मकान गिरने की घटनाओं में हुई हैं. कुल 25 लोगों ने भवन ढहने की अलग-अलग घटनाओं में अपनी जान गंवाई. इसके अलावा आकाशीय बिजली भी इस बार बेहद घातक साबित हुई है, जिससे 23 लोगों की मौत दर्ज की गई है. बारिश के दौरान तेज हवाओं और कमजोर पेड़ों के गिरने से भी कई लोगों की जान गई. पेड़ गिरने और भूस्खलन की घटनाओं में 6-6 लोगों की मौत हुई, जबकि बाढ़ से जुड़े हादसों में 2 लोगों ने दम तोड़ दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पुराने और जर्जर भवनों का जोखिम काफी बढ़ गया है.
बदल रहा मौसम का पैटर्न
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले कई दिनों से मुंबई, ठाणे, पुणे, कोंकण और घाट क्षेत्रों में भारी बारिश देखने को मिल रही थी. अब धीरे-धीरे इन इलाकों में बारिश की तीव्रता कम हो सकती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह टल गया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश का मुख्य क्षेत्र अब उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ की ओर शिफ्ट होने की संभावना है. अगले दो से तीन दिनों के दौरान इन क्षेत्रों के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने का अनुमान है. ऐसे में स्थानीय प्रशासन को पहले से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.
बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ा रहा चिंता
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अब मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है. इसी मौसमीय प्रणाली का असर महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में देखने को मिलेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य भारत के साथ-साथ उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश जारी रह सकती है. ऐसे में जिन क्षेत्रों में पहले से जमीन संतृप्त हो चुकी है, वहां भूस्खलन और जलभराव की आशंका अधिक बनी रहेगी.
कई जिलों में रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं. मुंबई और ठाणे के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है, जहां मध्यम से भारी बारिश की संभावना है. वहीं रायगढ़, पुणे और नासिक जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. सबसे ज्यादा चिंता पुणे घाट और नासिक घाट क्षेत्रों को लेकर है, जहां रेड अलर्ट घोषित किया गया है. इन इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश के साथ भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है.
हाई टाइड बढ़ा सकती है मुंबई की मुश्किलें
बारिश के साथ समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरें भी मुंबई के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. मौसम विभाग ने गुरुवार सुबह 6:47 बजे 3.49 मीटर और शाम 6:11 बजे 3.64 मीटर की हाई टाइड आने की संभावना जताई है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि हाई टाइड के समय तेज बारिश होती है तो समुद्र का पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पाएगा. इससे मुंबई के निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है. प्रशासन ने लोगों से समुद्र तटों पर जाने से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है.
पालघर और नासिक में सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हालात
राज्य के कई जिलों में लगातार बारिश का सिलसिला जारी है, लेकिन पालघर और नासिक की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है. नासिक में पिछले दो दिनों के दौरान 250 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है. वहीं पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में पिछले तीन दिनों में 752 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. अत्यधिक बारिश के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है और मोबाइल टावरों को भी नुकसान पहुंचा है. इससे लोगों को संचार सेवाओं में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
राहत और बचाव के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानकारी दी है कि प्रभावित इलाकों में मोबाइल सेवाओं को जल्द बहाल करने के निर्देश संबंधित कंपनियों को दिए गए हैं. इसके साथ ही भारी बारिश और संभावित आपदाओं को देखते हुए पालघर जिले में SDRF और NDRF की अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है. संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है. स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए.
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