दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति एक बार फिर चर्चा में है, जब अमेरिका की कांग्रेस को सौंपी गई US-China Economic and Security Review Commission की एक रिपोर्ट ने यह दावा किया कि चीन लंबे समय से फ्रांस के राफेल लड़ाकू विमान की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा था. रिपोर्ट में कहा गया कि यह अभियान केवल सोशल मीडिया स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि सूचनाओं में हेरफेर, फर्जी अकाउंटों का संचालन और एआई–जनित सैन्य तस्वीरों का प्रसार भी इसमें शामिल था.
रिपोर्ट के अनुसार, चीन का उद्देश्य दोहरा था—
इन आरोपों के बीच पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में रही. माना गया कि पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश की, जो कई स्तरों पर वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता था.
पाकिस्तानी एयर मार्शल के कथित दावे
मई माह के दौरान दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने की जो रिपोर्टें सामने आईं, उसी समय पाकिस्तान एयर फ़ोर्स के पूर्व एयर मार्शल मसूद अख्तर का एक इंटरव्यू वायरल हुआ. अख्तर के अनुसार, भारत द्वारा दागी गई ब्रह्मोस मिसाइलों ने भोलारी एयरबेस को निशाना बनाया था और मिसाइलों में से एक ने उस हैंगर को कथित रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया जिसमें पाकिस्तान का AWACS (Airborne Warning and Control System) विमान तैनात था.
AWACS पाकिस्तान के लिए एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन माना जाता है. यह विमान लंबी दूरी से निगरानी, रडार डेटा और दुश्मन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता प्रदान करता है. ऐसे में, यदि यह दावा सच होता, तो पाकिस्तान की निगरानी क्षमता को गंभीर आघात पहुंच सकता था.
⚡ BIG: Former Pak Air Marshal Masood Akhtar has confirmed that the AWACS was in the hangar of Pak Bholari Air Base when the 4 BrahMos Missiles hit and several PAF Pilots and Personnel were kill*d. pic.twitter.com/fBMXjW7ZDN
— Insider (@InsiderUpdates_) May 15, 2025
सैटेलाइट चित्रों को लेकर भी सोशल मीडिया पर विभिन्न दावे किए गए, हालांकि उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी.
सोशल मीडिया पर गलत सूचना अभियान
जहाँ भारतीय मीडिया कथित हमलों से हुए वास्तविक नुकसान की तस्वीरें और विश्लेषण प्रस्तुत कर रहा था, वहीं दूसरी ओर रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान और चीन मिलकर सोशल मीडिया पर एक अलग कथा को आगे बढ़ा रहे थे.
इस अभियान में—
शामिल बताई गईं.
अमरीकी रिपोर्ट का दावा है कि ये सब राफेल को अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में कमजोर साबित करने और J-35 को विकल्प के रूप में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया.
भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान नुकसान
विभिन्न विश्लेषकों और रिपोर्टों के अनुसार, मई वाले संघर्ष के समय पाकिस्तान को कई एयरबेसों पर नुकसान होने के दावे सामने आए. इन बेसों में—
जैसे प्रतिष्ठान शामिल थे.
इनमें से कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यदि वाकई इस प्रकार के हमले हुए थे, तो इससे पाकिस्तान की हवाई रक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर व्यापक असर पड़ सकता था.
प्रोपेगेंडा बनाम ज़मीनी हकीकत
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक युद्ध केवल मिसाइलों और विमानों से नहीं लड़ा जाता, बल्कि सोशल मीडिया, एआई और प्रोपेगेंडा भी उतने ही शक्तिशाली हथियार बन चुके हैं.
चीन और पाकिस्तान पर लगाए गए आरोप इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव बदलने के लिए किया जाता है. इसके विपरीत, भारत ने अपने पक्ष को सैटेलाइट चित्रों, आधिकारिक बयान और वास्तविक ऑपरेशनल क्षमता के प्रदर्शन के ज़रिए मजबूत करने की कोशिश की.
ये भी पढ़ें- लेबनान यूं ही नहीं हुआ खंडहर.. इजराइल ने किया इन बमों का इस्तेमाल; रिपोर्ट में हुआ खुलासा