पाकिस्‍तानियों को अब नहीं रहा मुनीर की सेना पर भरोसा! भारत से जंग के लिए महिलाएं ले रहीं ट्रेनिंग

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के प्रमुख शहर रावलपिंडी में सुरक्षा तैयारियाँ तेज़ कर दी गई हैं. देश की सेना का मुख्यालय होने के बावजूद, यहां के आम नागरिक, खासकर महिलाएं अब आत्मरक्षा प्रशिक्षण में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं.

Pakistanis no longer trust Munir's army! Women are taking training for war with India
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- FreePik

इस्लामाबाद/रावलपिंडी: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के प्रमुख शहर रावलपिंडी में सुरक्षा तैयारियाँ तेज़ कर दी गई हैं. देश की सेना का मुख्यालय होने के बावजूद, यहां के आम नागरिक, खासकर महिलाएं अब आत्मरक्षा प्रशिक्षण में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं.

रावलपिंडी, जो भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, हमेशा से एक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर रहा है. हालिया घटनाओं के बाद नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं और जागरूकता दोनों ही बढ़ी हैं.

सामाजिक जागरूकता में इज़ाफ़ा

रावलपिंडी जिला प्रशासन और पब्लिक सेफ्टी डिपार्टमेंट द्वारा शुरू किए गए विशेष नागरिक सुरक्षा कार्यक्रमों में अब तक करीब 3,500 वॉलंटियर्स ने हिस्सा लिया है. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आम लोगों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार करना है.

ट्रेनिंग सत्रों में नागरिकों को आग से बचाव, घायलों की प्राथमिक देखभाल, और इमारतों से लोगों को सुरक्षित निकालने जैसे आवश्यक कौशल सिखाए जा रहे हैं. यह ट्रेनिंग राजा बाजार स्थित मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल, पब्लिक सेफ्टी हेडक्वार्टर, और रावलपिंडी कैंट पुलिस स्टेशन जैसे स्थानों पर चल रही है.

विशेष बात यह है कि इन सत्रों में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है. महिलाएं न केवल आत्मरक्षा की ट्रेनिंग ले रही हैं, बल्कि आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा जैसी क्षमताओं में भी दक्षता हासिल कर रही हैं.

सायरन के ज़रिए अलर्ट सिस्टम सुदृढ़

रावलपिंडी प्रशासन ने शहरभर में 16 चेतावनी सायरन लगाए हैं, जिनका उद्देश्य हमले या आपात स्थिति के दौरान जनता को तुरंत अलर्ट करना है. इसके अलावा 38 नई चौकियों की स्थापना की गई है जो 24/7 निगरानी रखेंगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी.

नागरिक सतर्कता को भी मिल रहा बल

हालांकि रावलपिंडी में सेना की मज़बूत मौजूदगी है, लेकिन प्रशासन का मानना है कि नागरिकों को तैयार रखना भी उतना ही ज़रूरी है. इस पहल को लोगों का समर्थन भी मिल रहा है, क्योंकि यह उन्हें सुरक्षा को लेकर आत्मनिर्भर बनाता है.

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारत की सैन्य नीति में हमेशा आतंकवाद और आतंकी ढांचों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाती है. भारत किसी भी सैन्य कदम के दौरान नागरिक जीवन की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखता है.

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