पाकिस्तान का एक और फर्जीवाड़ा आया सामने, EO-3 के नाम पर फेक तस्वीरें वायरल, SUPARCO ने साधी चुप्पी

सोशल मीडिया पर एक नकली फेसबुक पेज ने EO-3 के नाम पर तीन फर्जी सैटेलाइट इमेज शेयर कीं. SUPARCO ने न तो इस नकली पेज को सार्वजनिक रूप से खारिज किया, न किसी तरह की सुधार या असली EO-3 इमेजरी दिखाई.

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Image Source: Social Media

पाकिस्तान के राष्ट्रीय अंतरिक्ष संगठन SUPARCO ने EO-3 सैटेलाइट लॉन्च कर अपनी घरेलू अंतरिक्ष क्षमता में एक महत्वपूर्ण कदम रखा है. EO-3 पाकिस्तान की PRSC-EOS पृथ्वी अवलोकन उपग्रह श्रृंखला का तीसरा सदस्य है और 25 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुँच गया. 

यह उपलब्धि असली है और इसमें कोई विवाद नहीं है. लेकिन लॉन्च के बाद सोशल मीडिया पर एक नकली फेसबुक पेज ने EO-3 के नाम पर तीन फर्जी सैटेलाइट इमेज शेयर कीं. SUPARCO ने न तो इस नकली पेज को सार्वजनिक रूप से खारिज किया, न किसी तरह की सुधार या असली EO-3 इमेजरी दिखाई. इस बार की चुप्पी कोई गलती नहीं है, बल्कि यह एक पैटर्न बन गया है.

नकली इमेज की कहानी

लॉन्च के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया पर EO-3 की पहली इमेज के रूप में कराची पोर्ट की एक तस्वीर वायरल हुई. यह तस्वीर उस समय शेयर की गई जब लोगों में लॉन्च के प्रति गर्व का भाव सबसे ज्यादा था. लेकिन जाँच में पता चला कि यह वही तस्वीर है जिसे SUPARCO ने 2025 में अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया था. EO-3 पहले से ही कक्षा में था, और यह तस्वीर महीनों से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी. यह EO-3 की पहली कैप्चर नहीं हो सकती थी.

यह कराची पोर्ट की तस्वीर उस नकली फेसबुक पेज पर साझा की गई तीन फर्जी इमेज में से एक थी. बाकी दो: एक AI-जेनरेटेड बंदरगाह इन्फ्रास्ट्रक्चर जिसे ओर्मारा नेवल बेस की तस्वीर में जोड़ा गया और इसे ग्वादर बताया गया; और फैसल मस्जिद, इस्लामाबाद का एक नक्शा, जिसे PakTES-1A सैटेलाइट का बताकर फर्जी मेटाडेटा दिया गया. SUPARCO की प्रतिक्रिया इन तीनों मामलों में भी वही रही: चुप्पी.

SUPARCO ने साधी चुप्पी

इस तरह की चुप्पी में एक प्रकार की नौकरशाही तर्कशीलता है. सुधार या खंडन करने से यह स्वीकार करना पड़ता है कि कुछ गलत था. चुप्पी बनाए रखने से विवाद समय के साथ फीका पड़ जाता है. लेकिन इस बार यह गणना गलत साबित हुई.

नकली पेज ने सोशल मीडिया पर लगातार अपनी पहुंच बनाये रखी. टिप्पणियों में लोग इन तस्वीरों को असली मान रहे थे. जब तक SUPARCO ने कोई आधिकारिक मार्गदर्शन नहीं दिया कि कौन सी जानकारी असली है और कौन नकली, तब तक कई लोग भ्रमित रहे. और आज भी यह भ्रम मौजूद है.

डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल

EO-3 का इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किया जाना है. इसके लिए जरूरी है कि उपयोगकर्ता – सरकारी मंत्रालय, अंतरराष्ट्रीय साझेदार और निजी क्षेत्र – इमेजरी की प्रामाणिकता पर भरोसा करें. यदि एक एजेंसी अपने ही नकली पेज और AI-निर्मित फर्जी तस्वीरों को अलग नहीं कर सकती, तो यह डेटा की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करती है. SUPARCO ने EO-3 के लिए अभी तक तकनीकी विवरण या सत्यापित इमेजरी जारी नहीं की है.

इतिहास और पैटर्न

पाकिस्तान में पहले भी ऐसा देखा गया है. Paksat-1 के समय गलत दावे किए गए थे, जिन्हें कभी आधिकारिक रूप से खारिज नहीं किया गया. मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सोशल मीडिया पर नकली फुटेज वायरल हुआ. फैक्ट-चेकर्स ने इन फर्जी सामग्री को पुरानी लड़ाईयों, संग्रहीत फुटेज और एक सैन्य सिमुलेशन वीडियो गेम से जोड़ा. फिर भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई.

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