पाकिस्तान में नेपाल जैसी क्रांति, क्या जाएगी प्रधानमंत्री शहबाज और आसिम मुनीर की गद्दी?

दक्षिण एशिया में राजनीतिक हलचल का नया अध्याय नेपाल से शुरू हुआ है, जहां जेनरेशन-Z के युवाओं ने पुरानी व्यवस्था को चुनौती देते हुए केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया.

Pakistan Situation is just like nepal will shahbaz and munir resign
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दक्षिण एशिया में राजनीतिक हलचल का नया अध्याय नेपाल से शुरू हुआ है, जहां जेनरेशन-Z के युवाओं ने पुरानी व्यवस्था को चुनौती देते हुए केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया. यह जनांदोलन महज़ एक सरकार के खिलाफ गुस्सा नहीं था, बल्कि भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और राजनीतिक निष्क्रियता के विरुद्ध एक सुनियोजित प्रतिक्रिया थी.

नेपाल की सड़कों पर उतरे इन युवाओं की गूंज अब पाकिस्तान तक पहुंच गई है – और वहां की सत्ता में बैठे लोग इस बदलाव से डरे हुए हैं.

पाकिस्तान में बढ़ता संकट और घुटन भरा माहौल

पाकिस्तान इस वक्त गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है. देश पर 125 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज है. सरकार की 75% आमदनी सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च हो रही है. जरूरी चीज़ों की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं.

  • दूध: ₹260–280 प्रति लीटर
  • टमाटर: ₹180 प्रति किलो
  • आटा: ₹122 प्रति किलो. भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का स्थान इस सूची में 135वां है – यह दर्शाता है कि शासन व्यवस्था किस हद तक चरमराई हुई है.

आवाज़ उठाने लगी है जनता, लेकिन सरकार कर रही है दमन

देशभर में सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. इमरान खान के समर्थक खुलकर सड़कों पर उतर रहे हैं. रोजमर्रा की चीज़ों के लिए संघर्ष कर रहे लोग ‘हमें खत्म कर दो’ जैसे नारे लगाने पर मजबूर हैं. पुलिस कार्रवाई, इंटरनेट बैन और सोशल मीडिया पर सेंसरशिप के जरिए विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है. पाकिस्तानी सत्ता को अब यह डर सता रहा है कि नेपाल जैसी लहर उनके देश में भी न उठ जाए. शायद यही वजह है कि नेपाल में हुए हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को पाकिस्तानी मीडिया में दिखाने पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया गया है.

बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा: नियंत्रण से बाहर होते हालात

पाकिस्तानी सेना के लिए अंदरूनी हालात लगातार मुश्किल बनते जा रहे हैं. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में रोज़ाना सुरक्षा बलों पर हमले हो रहे हैं. कई क्षेत्रों में सेना का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है. गृहयुद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं, जिससे पूरे देश की स्थिरता खतरे में पड़ गई है.

दक्षिण एशिया में बदलाव की आंधी

पिछले कुछ वर्षों में एशियाई देशों में सत्ता परिवर्तन की लहर देखी गई है. श्रीलंका में महंगाई और बदहाली ने सरकार गिराई. बांग्लादेश में सत्ता के केंद्रीकरण के खिलाफ आक्रोश बढ़ा. इंडोनेशिया और फिर नेपाल में भी जनता ने एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की. इन सभी देशों में एक चीज़ समान रही – भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, और जनता से कटे हुए नेता. पाकिस्तान की स्थिति आज इन सभी उदाहरणों से मेल खा रही है, और इसी कारण विशेषज्ञों का मानना है कि अगला बड़ा राजनीतिक बदलाव यहीं हो सकता है.

क्या पाकिस्तान तैयार है बदलाव के लिए?

नेपाल में जेनरेशन-Z ने यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया के प्रतिबंध और राजनीतिक डरावों से युवा अब डरने वाले नहीं हैं. पाकिस्तान की सरकार यदि इन चेतावनियों को नजरअंदाज करती है, तो वह दिन दूर नहीं जब सड़कों पर उठती आवाज़ें सत्ता के गलियारों की चूलें हिला दें.

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