इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सिंध प्रांत के बंटवारे को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के लंदन पहुंचने के बाद इस मुद्दे पर पाकिस्तान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. रिपोर्टों के मुताबिक, लंदन में हुई एक बैठक में जरदारी और उनके बेटे बिलावल भुट्टो ने सिंध के बंटवारे का विरोध करने का फैसला किया है.
सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है और इसे पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. ऐसे में प्रांत के बंटवारे की किसी भी कोशिश को पीपीपी अपने राजनीतिक हितों के लिए बड़ा खतरा मान रही है. इसी बीच सिंध विधानसभा ने भी प्रांत के विभाजन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है.
लंदन में जरदारी और बिलावल की अहम बैठक
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में आसिफ अली जरदारी, बिलावल भुट्टो और पार्टी के कुछ नेताओं के बीच करीब पांच घंटे तक बैठक हुई. इसमें सिंध के बंटवारे से जुड़े किसी भी फैसले का विरोध करने पर सहमति बनी.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि आर्मी चीफ असीम मुनीर की ओर से गृह मंत्री मोहसिन नकवी के जरिए जरदारी तक संदेश पहुंचाया गया है. इसमें सिंध को तीन हिस्सों में बांटने की योजना को लेकर दबाव बनाए जाने की बात कही गई है. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
सिंध को लेकर पीपीपी ने खोला मोर्चा
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सिंध की मौजूदा सीमाओं और क्षेत्रीय एकता में किसी भी बदलाव का विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि नए प्रांत बनाने जैसे किसी भी फैसले पर राजनीतिक सहमति जरूरी होनी चाहिए.
पीपीपी ने उन प्रस्तावों का भी विरोध किया है, जिनसे सिंध का विभाजन हो सकता है. इनमें कराची को अलग करने या अलग दक्षिणी प्रांत बनाने जैसे विचार शामिल बताए जा रहे हैं.
यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब सिंध विधानसभा ने भी प्रांत के बंटवारे या विधानसभा की मंजूरी के बिना नए प्रशासनिक क्षेत्र बनाने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.
सिंध के मुख्यमंत्री ने भी साफ किया रुख
सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने विधानसभा में प्रांत की एकता को लेकर सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि सिंध की क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि सिंध का बंटवारा कौन चाहता है और कौन इसका विरोध कर रहा है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिंध की सीमाओं से जुड़े किसी भी मुद्दे पर संविधान और संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा होनी चाहिए.
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सिंध के बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा सबसे पहले प्रांतीय विधानसभा के बाहर शुरू हुई. पीपीपी का कहना है कि सिंध से जुड़े किसी भी बड़े फैसले में जनता और राजनीतिक दलों की सहमति जरूरी है.
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