पाकिस्तान में होगा तख्ता पलट! रावलपिंडी में होने वाला है बड़ा खेला, लंदन में हुई गुप्त मीटिंग

Pakistan Coup: पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में विरोध प्रदर्शन और बलूचिस्तान में बढ़ती बगावत के बीच अब सत्ता के सबसे बड़े केंद्रों के बीच भी टकराव की खबरें सामने आ रही हैं.

Pakistan reports of a standoff between the army and the president threat of another coup
Image Source: Social Media

Pakistan Coup: पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में विरोध प्रदर्शन और बलूचिस्तान में बढ़ती बगावत के बीच अब सत्ता के सबसे बड़े केंद्रों के बीच भी टकराव की खबरें सामने आ रही हैं. दावा किया जा रहा है कि सेना के मुख्यालय रावलपिंडी और राष्ट्रपति भवन के बीच तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर तख्तापलट की चर्चा तेज हो गई है.

रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच बढ़ी दूरी

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच पर्दे के पीछे तनाव चल रहा है. नए सूबे बनाने और 28वें संविधान संशोधन को लेकर विवाद ने इस टकराव को और बढ़ा दिया है.

पाकिस्तान की राजनीति में सेना का प्रभाव लंबे समय से रहा है. वहां कई बार चुनी हुई सरकारों और सेना के बीच सत्ता को लेकर टकराव देखने को मिला है. अल्ताफ हुसैन के मुताबिक इस बार रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच हालात काफी गंभीर हो गए हैं.

लंदन में गुप्त मुलाकात का दावा

अल्ताफ हुसैन ने अपने 462वें टिकटॉक वीडियो संदेश में दावा किया कि सेना और राष्ट्रपति जरदारी के रिश्ते बेहद नाजुक दौर में पहुंच चुके हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में संविधान और प्रशासनिक सीमाओं को लेकर इतनी बड़ी चर्चा चल रही है, तब राष्ट्रपति जरदारी कई हफ्तों से विदेश में क्यों हैं.

जरदारी पहले अपने बेटे बिलावल जरदारी की शादी के सिलसिले में ऑस्ट्रिया गए थे. इसके बाद वह लंदन चले गए. अल्ताफ हुसैन का दावा है कि हाल ही में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लंदन में जरदारी से मुलाकात की. उनके मुताबिक यह करीब एक घंटे तक चली बंद कमरे की बैठक थी, जिसमें सेना की ओर से एक अहम संदेश राष्ट्रपति तक पहुंचाया गया.

नए सूबों के मुद्दे पर भी विवाद

पाकिस्तान में नए प्रशासनिक प्रांत बनाने को लेकर भी बहस तेज है. अल्ताफ हुसैन का आरोप है कि इस मुद्दे को गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सेना के जनसंपर्क विभाग ने आगे बढ़ाया. उनका दावा है कि सेना नए सूबों के जरिए अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहती है.

अल्ताफ हुसैन ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी योजना की जिम्मेदारी मुहाजिर समुदाय पर डालने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी पर सिंध में जानबूझकर तनाव और नफरत बढ़ाने का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुहाजिरों की सुरक्षा और उनकी चिंताओं पर ध्यान देने की अपील की.

28वें संविधान संशोधन के जरिए नए सूबे बनाने की चर्चा के बीच इससे पहले 26वें और 27वें संशोधन को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच सहमति और सौदेबाजी की खबरें सामने आती रही हैं.

क्या पाकिस्तान में फिर लगेगा मार्शल लॉ?

अल्ताफ हुसैन ने चेतावनी दी है कि अगर सेना और राष्ट्रपति के बीच बातचीत से विवाद नहीं सुलझा तो पाकिस्तान का लोकतांत्रिक ढांचा और कमजोर हो सकता है. उनके मुताबिक मौजूदा हालात आगे चलकर दो संभावित रास्तों की ओर बढ़ सकते हैं.

पहला, देश में फिर से सैन्य शासन यानी मार्शल लॉ लगाया जा सकता है. दूसरा, जरदारी और उनकी सरकार को हटाकर किसी अंतरिम सरकार को जिम्मेदारी दी जा सकती है. पाकिस्तान के इतिहास में सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच टकराव कई बार बड़े राजनीतिक बदलाव की वजह बना है. इसी वजह से देश में एक बार फिर तख्तापलट की चर्चा जोर पकड़ रही है.

सिंध से बलूचिस्तान तक बढ़ता तनाव

पाकिस्तान में राजनीतिक खींचतान के साथ कई इलाकों में असंतोष भी बढ़ रहा है. सिंध में सेना और सिंधी राष्ट्रवादी संगठनों के बीच तनाव की बात कही जा रही है. अल्ताफ हुसैन ने चेतावनी दी है कि अगर यह टकराव जारी रहा तो सिंध में हिंसा और अशांति बढ़ सकती है.

वहीं बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और बलूच अलगाववादी संगठनों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है. अल्ताफ हुसैन का कहना है कि बलूच लोगों की समस्याओं को सिर्फ ताकत के दम पर खत्म नहीं किया जा सकता. उनका दावा है कि अगर उनकी मांगों और अधिकारों पर राजनीतिक तरीके से बात नहीं की गई तो आने वाले समय में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं.

ये भी पढ़ें- 50 साल बाद पाकिस्तान में बड़ा बदलाव, असीम मुनीर को मिल गई अपार शक्ति, जानें इसके मायने