Sir Creek Conflict: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सर क्रीक इलाके में दिए गए सख्त बयान के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा गतिविधियाँ तेज हो गई हैं. सितंबर के दशहरा अवसर पर सर क्रीक का दौरा कर भारतीय सैनिकों के साथ शस्त्र पूजा में हिस्सा लेने के बाद मंत्री ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि यदि इस संवेदनशील इलाके में कोई सैन्य हरकत हुई तो उसका जवाब कठोर होगा. उनके बयान ने पड़ोसी देश में घबराहट बढ़ा दी और पाकिस्तान की नौसेना ने इलाके में अपनी उपस्थिति मजबूत कर दी है.
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ ने शीघ्रता से सर क्रीक के फॉरवर्ड पोस्ट का निरीक्षण किया और वहां तीन होवरक्राफ्ट तैनात करने की जानकारी दी गई है. ये होवरक्राफ्ट ब्रिटेन से खरीदे गए हैं और नौसेना ने इन्हें पानी और जमीन दोनों पर संचालन के लिए तैयार बताया है. एडमिरल अशरफ ने कहा कि सर क्रीक से लेकर बलूचिस्तान के जिवानी तक पाकिस्तानी संप्रभुता की रक्षा की जाएगी.
राजनाथ सिंह के बयान की पृष्ठभूमि
दशहरा के मौके पर दिए गए अपने बयान में रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि 1965 के युद्ध की शुरुआत सर क्रीक से जुड़ी घटनाओं के साथ हुई थी. उन्होंने कहा कि कराची तक जाने वाले कुछ रास्ते इसी इलाके से होकर गुजरते हैं और इसलिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने बार-बार बातचीत के ज़रिए विवाद सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन पाकिस्तान की मंशा स्पष्ट नहीं दिखी और हाल में वहाँ सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के संकेत मिले हैं.
सीमाओं की सुरक्षा और प्रतिवाद की चेतावनी
राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट किया कि भारत की सीमाओं की रक्षा भारतीय सेना और बीएसएफ मिलकर कर रही हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सर क्रीक में कोई भी ‘‘हिमाकत’’ की जाती है तो उसका जवाब शक्तिशाली और निर्णायक होगा, ऐसा जवाब कि ‘‘इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएँ’’. उन्होंने ऑपरेशन सिंधूर का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय सुरक्षा तंत्र ने आवश्यक कार्रवाई कर पाकिस्तान के कुछ रक्षा ढाँचों को उजागर किया था.
स्थिति का समग्र आकलन
सर क्रीक का मुद्दा कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर संवेदनशील है. हाल के महीनों में दोनों देशों की सीमावर्ती गतिविधियों और रुख की वजह से तनाव के बढ़ने की आशंका बनी रहती है. पाकिस्तान की ओर से तैनाती और भारत के सघन निगरानी-और-प्रतिक्रिया के संकेतों के बीच कोई भी अप्रत्याशित सैन्य घटना स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता पर असर डाल सकती है.
अगला कदम क्या हो सकता है
अब देखना होगा कि दोनों पक्ष किस तरह कूटनीतिक चैनलों का उपयोग करते हैं और कमांड स्तर पर किन-किन नियंत्रण व सावधानी के उपाय अपनाए जाते हैं. तनाव कम करने के लिए पारंपरिक और द्विपक्षीय संवाद, साथ ही सीमाओं पर प्रत्याशित घटनाओं को नियंत्रित करने वाले तंत्र की सक्रियता अहम होगी.
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