Mecca Defense Pact: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए डिफेंस समझौते के बाद इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस समझौते के तहत मिली रक्षा जिम्मेदारियों के कारण पाकिस्तान पश्चिम एशिया के बढ़ते संघर्ष में फंस सकता है. यमन में सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर भी दबाव बढ़ सकता है.
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में इस समझौते को पाकिस्तान के लिए रणनीतिक फायदे के तौर पर देखा गया था. पिछले साल सितंबर में रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ आसिम मुनीर भी मौजूद थे. समझौते के तहत सऊदी अरब पाकिस्तान में निवेश और आर्थिक मदद करेगा, जबकि पाकिस्तान सऊदी सेना को ट्रेनिंग देने के साथ किसी भी हमले की स्थिति में उसकी रक्षा करेगा.
क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार होगा और मध्य पूर्व का तनाव धीरे-धीरे कम हो जाएगा. लेकिन अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों और उसके बाद ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर किए गए मिसाइल हमलों ने हालात बदल दिए.
इसके बाद सऊदी अरब और हूती के बीच भी तनाव फिर बढ़ गया. हूती लड़ाकों की यमन में बढ़त और सऊदी ठिकानों पर हमलों के बाद रियाद ने जवाबी कार्रवाई की. हाल के दिनों में यमन में संघर्ष और तेज हुआ है और हूती सऊदी अरब के इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं.
समझौते का विस्तार
इस साल अगस्त में पाकिस्तान के लिए स्थिति और जटिल हो गई, जब सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते का विस्तार किया गया और इसमें तुर्की को भी शामिल किया गया. इसके बाद इसे 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' कहा गया. समझौते में यह तय किया गया कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा.
रिपोर्ट में रक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दीका के हवाले से कहा गया है कि उन्हें नहीं लगता कि आसिम मुनीर ने क्षेत्र में मौजूद खतरों का सही आकलन किया था. उनके मुताबिक, पाकिस्तान को इतनी जल्दी अपनी सेना को किसी नए मोर्चे पर भेजने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.
पाकिस्तान की सऊदी पर निर्भरता
रिपोर्ट में सऊदी अरब पर पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता का भी जिक्र किया गया है. सऊदी अरब से मिलने वाली आर्थिक मदद और निवेश से पाकिस्तान को काफी सहारा मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसी वजह से पाकिस्तान के अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं देश को पूरे क्षेत्र में फैल रहे संघर्ष में सीधे शामिल न होना पड़े.
पाकिस्तान की सीमा ईरान से लगती है और देश पहले से ही अपनी सीमाओं पर उग्रवाद और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है. अगर पाकिस्तान हूती के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई करता है, तो इसे ईरान के खिलाफ इस्लामाबाद के रुख के तौर पर देखा जा सकता है. इससे पाकिस्तान के लिए क्षेत्रीय और घरेलू स्तर पर नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
पाकिस्तान को चेतावनी
पाकिस्तान की सीनेट में विपक्ष के नेता राजा नासिर अब्बास ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान इस युद्ध में शामिल होता है तो इसका देश पर गंभीर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले ही दो बड़े विद्रोहों का सामना कर रहा है, जबकि अर्थव्यवस्था दबाव में है और महंगाई भी बढ़ी हुई है.
पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार फैल रहा है. यमन में हूती और सऊदी अरब के बीच लड़ाई तेज होने के साथ ईरान भी इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है. हालिया हमलों ने तेल और गैस से जुड़े बुनियादी ढांचे के साथ-साथ समुद्री रास्तों और जहाजों की आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है.
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