गोलमाल है भई...सब गोलमाल है! पाकिस्तान में फर्जी डिग्री वाला जज, 5 साल तक सुनाता रहा फैसले

Pakistan Fake Law Degree Judge: पाकिस्तान में आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं जो दुनिया को हैरान कर देती हैं. अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Pakistan High Court Fake Law Degree Judge removed from post after five years
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Pakistan Fake Law Degree Judge: पाकिस्तान में आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं जो दुनिया को हैरान कर देती हैं. अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) में एक जज ने पिछले पांच साल तक एक फर्जी लॉ डिग्री के साथ काम किया, जिससे यह साबित हो गया कि पाकिस्तान में अक्सर कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जाती हैं. अब इस मामले में एक अदालत ने फैसला सुनाया है और दोषी जज को उनके पद से हटा दिया है.

फर्जी डिग्री और धोखाधड़ी का खेल

पाकिस्तान के इस्लामाबाद हाईकोर्ट में 23 फरवरी 2026 को 116 पन्नों का एक विस्तृत फैसले में यह साबित हुआ कि जस्टिस तारिक महमूद जहांगीरी ने अपनी शिक्षा से संबंधित दस्तावेजों में गड़बड़ी की थी. जहांगीरी को दिसंबर 2020 में हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया था, लेकिन एक साल पहले सितंबर 2025 में उन्हें न्यायिक कर्तव्यों से हटा दिया गया था. कोर्ट का कहना था कि उनकी डिग्री फर्जी थी और उनका पूरा करियर एक धोखाधड़ी पर आधारित था. अदालत ने जहांगीरी के एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स को नकली करार दिया, जो उन्होंने पहले भी बदलने की कोशिश की थी.

उच्च शिक्षा में फर्जीवाड़ा और नकल का मामला

जस्टिस जहांगीरी का फर्जीवाड़ा बहुत ही चौंकाने वाला था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 1988 में एक फर्जी एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल किया था, जिससे वह परीक्षा में बैठे थे. हालांकि, उन्हें नकल करते हुए पकड़ लिया गया और इसके बाद 1989 में उस पर 3 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया. लेकिन जहांगीरी ने अपनी सजा को स्वीकार करने के बजाय एक और चाल चली. उन्होंने एक और छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल कर तारिक महमूद नाम से परीक्षा दी, और इस बार भी वह सफल रहे.

कोर्ट की कार्रवाई और जज की टालमटोल

जब अदालत ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की तो पाया कि जस्टिस जहांगीरी को कई बार दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का मौका दिया गया था, लेकिन वह हर बार इसे टालते रहे. अदालत ने यह भी कहा कि उनके पास फर्जी दस्तावेज थे और वह इसके बावजूद अपने पद पर बने रहे. जहांगीरी ने इस मामले में लगातार समय खींचने की कोशिश की और सिंध हाईकोर्ट में लंबित पड़े मामले का हवाला दिया. अदालत ने कहा कि जज का यह तरीका सिर्फ टालमटोल करने वाला था और यह उसके खिलाफ और भी मजबूत सबूत बन गए.

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