Saifullah Kasuri On Pakistan: दक्षिण एशिया के पहले से ही जटिल सुरक्षा हालात उस वक्त और संवेदनशील हो गए, जब संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने खुले तौर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश के बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक रिश्तों पर अपनी राय जाहिर कर दी. यह कोई सामान्य प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि ऐसा बयान था जिसने भारत समेत पूरे क्षेत्र की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है.
लश्कर के कुख्यात आतंकी सैफुल्लाह कसूरी ने एक स्कूल कार्यक्रम के मंच से यह कहकर सबको चौंका दिया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकी एक “सकारात्मक संकेत” है. इसके बाद सामने आए एक वायरल वीडियो में कसूरी ने और भी सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने जवानों के जनाजे में आमंत्रित करती है और उसकी बढ़ती ताकत से भारत घबराया हुआ है.
Pakistani Terror Group Lashkar e Tayyiba welcomes growing diplomatic and military ties between Pakistan & Bangladesh.
— Frontalforce 🇮🇳 (@FrontalForce) January 11, 2026
UN-designated Pakistan based Lashkar terrorist Saifullah Kasuri congratulated the growing closeness between Pakistan and Bangladesh.
pic.twitter.com/6sFV9GyWVx
खुफिया एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी
कसूरी के ये बयान केवल बयानबाज़ी भर नहीं माने जा रहे. भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान लश्कर की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल कश्मीर तक सीमित नहीं है.
खुफिया इनपुट्स की मानें तो लश्कर-ए-तैयबा अब भारत के पूर्वी मोर्चे, खासतौर पर बांग्लादेश से सटे इलाकों में अपने नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है. बदलते राजनीतिक हालात और क्षेत्रीय समीकरणों का फायदा उठाकर संगठन एक नए टेरर इकोसिस्टम की नींव रखने की फिराक में है.
क्या बांग्लादेश बन सकता है नया आतंकी लॉन्चपैड?
सैफुल्लाह कसूरी का यह बयान केवल एक गीदड़भभकी नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस पुरानी नीति का विस्तार माना जा रहा है, जिसे अक्सर “हजार जख्मों से वार” की रणनीति कहा जाता है. बांग्लादेश में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह से इस्लामाबाद और ढाका के बीच सैन्य सहयोग और संवाद बढ़ा है, उस पर लश्कर की खुशी भारत के लिए स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय है.
विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर अब कश्मीर केंद्रित गतिविधियों से आगे बढ़कर बांग्लादेश की खुली सीमाओं का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में घुसपैठ के नए रास्ते तलाश सकता है. यह रणनीति भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक नया और जटिल खतरा पैदा कर सकती है.
पाकिस्तानी सेना और आतंकी गठजोड़ के संकेत
कसूरी द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहना कि उसका पाकिस्तानी सेना के साथ आधिकारिक स्तर पर संपर्क है, कई गंभीर सवाल खड़े करता है. यह संकेत देता है कि पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव की परवाह किए बिना आतंकियों को अपनी रणनीतिक नीति के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करता रहा है.
अगर भविष्य में बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए होने लगता है, तो भारत को दो तरफा सुरक्षा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है—एक पश्चिमी सीमा पर और दूसरी पूर्वी सीमा पर. यह स्थिति केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और आंतरिक सुरक्षा के स्तर पर भी भारत के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
भारत के लिए नया सामरिक चक्रव्यूह?
पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकी को केवल कूटनीतिक सहयोग के तौर पर देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा. जिस तरह से आतंकी संगठन इस रिश्ते को खुलेआम समर्थन दे रहे हैं, उससे यह दोस्ती सामरिक दबाव बनाने की कोशिश जैसी नजर आने लगी है.
यह पूरा घटनाक्रम संकेत देता है कि भारत को अपनी पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर समानांतर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाकर यह स्पष्ट करना भी जरूरी हो गया है कि क्षेत्रीय सहयोग की आड़ में आतंक को संरक्षण देना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका
अब यह केवल भारत-पाकिस्तान या भारत-बांग्लादेश का मुद्दा नहीं रह गया है. यह दक्षिण एशिया की सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न बन चुका है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह समय है कि वह पाकिस्तान और बांग्लादेश के बढ़ते सैन्य सहयोग के पीछे छिपे संभावित आतंकी खतरों को गंभीरता से परखे. अगर समय रहते इस गठजोड़ पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें- उत्तर भारत में ठंड का कहर, 3 डिग्री सेल्सियस पहुंचा पारा; दिल्ली में भी हो रही ठिठुरन