दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन को प्रभावित करने वाली एक अहम डिफेंस डील में, पाकिस्तान को अमेरिका से उन्नत AIM-120 AMRAAM (एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल) मिलने की तैयारी है. यह जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग द्वारा जारी एक हालिया प्रेस रिलीज जारी कर दी गई है. मिसाइल डिलीवरी के इस अनुबंध से भारत की सामरिक चौकसी और सुरक्षा रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है.
इस सौदे के तहत अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनी रेथियॉन को 4.16 करोड़ डॉलर का संशोधित आदेश मिला है. इसके बाद इस अनुबंध का कुल मूल्य 2.51 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है. यह डील विदेशी सैन्य बिक्री (Foreign Military Sales) के तहत की जा रही है, जिसमें पाकिस्तान के अलावा कई नाटो और अमेरिकी सहयोगी देशों के नाम भी शामिल हैं, जैसे - ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की.
AIM-120 AMRAAM: हवा से हवा में मार करने वाली ताक़तवर मिसाइल
AIM-120 AMRAAM एक आधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी से दुश्मन के विमान को टारगेट करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मिसाइल F-16 फाल्कन जैसे फाइटर जेट्स के साथ काम करती है. पाकिस्तान पहले से ही इस मिसाइल के पुराने C5 वर्जन का उपयोग कर रहा है, जिसे उसने 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत के साथ हवाई झड़प में प्रयोग किया था. नए अनुबंध के तहत पाकिस्तान को इसका C8 और D3 वर्जन मिलने की संभावना है, जो ज्यादा रेंज और सटीकता के साथ हमले करने में सक्षम हैं.
बालाकोट एयरस्ट्राइक और AMRAAM मिसाइल का इतिहास
फरवरी 2019 में भारत ने बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप पर एयरस्ट्राइक की थी, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए थे. इसके जवाब में पाकिस्तान ने अपने F-16 फाइटर जेट्स से AMRAAM मिसाइलें दागीं थीं. हालांकि, भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान के मंसूबे नाकाम किए बल्कि एक पाकिस्तानी F-16 को भी मार गिराया गया था.
पाकिस्तान की वायुसेना का अपग्रेडेशन
अब पाकिस्तान को नई तकनीक वाली AMRAAM मिसाइलें मिलने से उसकी वायुसेना की मारक क्षमता में इजाफा हो सकता है. माना जा रहा है कि यह सौदा उसके F-16 फ्लीट के अपग्रेडेशन प्रोग्राम का हिस्सा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान को कितनी मिसाइलें मिलेंगी.
भारत के लिए क्या है खतरा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की वायुसेना को मिलने वाली ये मिसाइलें भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं, खासकर जब पाकिस्तान बार-बार सीमापार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है. इन मिसाइलों की सहायता से पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रामक रणनीति अपना सकता है.
अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में फिर से गर्माहट?
इस डील को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हालिया रिश्तों में आ रहे सुधार के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत के साथ संघर्षविराम कराने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता की सराहना की थी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम की सिफारिश नोबेल पुरस्कार के लिए भी की थी.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि
7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया. इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. चार दिन तक चले इस तनाव के बाद 10 मई को हालात सामान्य हुए.
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