बांग्लादेश खरीदने जा रहा है चाइना का माल!...ऑपरेशन सिंदूर में भारत दे चुका मात, उसी की डील करेगी यूनुस सरकार

मई 2025 के चार-दिन के एयर ऑपरेशन ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब चीनी वर्जन J-10CE की परफ़ॉर्मेंस पर सवाल उठे थे, तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि अब यही जेट बांग्लादेश के बेड़े में जाने वाला है. बांग्लादेश के 20 J-10CE लेने के प्रस्तावित सौदे (लगभग 2.2 अरब डॉलर) की खबर ने इलाके में सुरक्षा चर्चा फिर तेज कर दी है.

Bangladesh J-10CE Fighter jet Deal with china
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मई 2025 के चार-दिन के एयर ऑपरेशन ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब चीनी वर्जन J-10CE की परफ़ॉर्मेंस पर सवाल उठे थे, तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि अब यही जेट बांग्लादेश के बेड़े में जाने वाला है. बांग्लादेश के 20 J-10CE लेने के प्रस्तावित सौदे (लगभग 2.2 अरब डॉलर) की खबर ने इलाके में सुरक्षा चर्चा फिर तेज कर दी है.

ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) में भारत ने पाकिस्तान पर हवाई कार्रवाई की थी. सार्वजनिक बीमारियों और ओपन सोर्स रिपोर्ट्स के आधार पर यह तय हुआ कि उस समर में पाक वायुसेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कुछ चीनी-सप्लायड प्लेटफ़ॉर्म की परफ़ॉर्मेंस भी खराब दिखी. मिली रिपोर्टों में J-10CE के रडार, मिसाइल गाइडेंस और कुछ मामलों में हार्ड-लैंडिंग जैसी घटनाओं का जिक्र आया—जिसने इस जेट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए.

बांग्लादेश क्यों फिर भी खरीद रहा है J-10CE?

सुरक्षा चुनौतियों और पुराने बेड़े को अद्यतन करने की ज़रूरत के मद्देनज़र बांग्लादेश J-10CE को अपनाने की योजना बना रहा है. समझा जा रहा है कि यह पैकेज 20 जेट्स का है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.2 अरब डॉलर बताई जा रही है. इसमें उपकरण, प्रशिक्षण, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल हैं. बेसिक गणना के मुताबिक़ हर जेट की बेस कीमत करीब 60 मिलियन डॉलर आंकी जा रही है; शेष राशि प्रशिक्षण और सपोर्ट पर खर्च होगी. डिलीवरी 2026–27 के बीच प्रस्तावित है और भुगतान किस्तों में (10 साल तक) संभव है.

बांग्लादेश की मौजूदा वायु क्षमता और जरूरत

वर्तमान में बांग्लादेश एयर फ़ोर्स के पास करीब 212 विमान हैं, जिनमें लगभग 44 फाइटर जेट शामिल हैं—ज्यादातर पुराने चीनी F-7 वर्जन. कुछ MiG‑29B और हल्के अटैक प्लेटफ़ॉर्म भी बेड़े में मौजूद हैं. J-10CE के शामिल होने से पुरानी मशीनों को बदलकर देश की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूती मिलेगी.

भारत और क्षेत्रीय निहितार्थ: किन चुनौतियों से निपटना होगा?

यदि यह सौदा पक्का होता है तो भारत के सामने रणनीतिक रूप से कुछ नई चुनौतियाँ आ सकती हैं. पूर्वी सीमा के समीप बांग्लादेश के पास आधुनिक मल्टीरोल फाइटर होने से इलाके में वायु संतुलन प्रभावित हो सकता है.भारत को विभिन्न मोर्चों पर पश्चिम में पाकिस्तान‑चीन के साथ और पूर्व में बांग्लादेश—अपनी एयर डिफेंस पोस्टर को और मजबूत रखना पड़ सकता है. राफेल, सिस्टम उन्नयन, और लॉजिस्टिक‑रिडंडेंसी पर ध्यान बढ़ाना ज़रूरी होगा. कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा भागीदारी के जरिये संभावित खतरों को मैनेज करना होगा.

-10CE: क्या खासियतें और सीमाएँ हैं?

J-10CE चीन का एक बहु‑भूमिका (multi‑role) फाइटर है — J-10C का एक्सपोर्ट‑वर्जन। मुख्य तकनीकी बिंदु (सामान्य विवरण):

  • लम्बाई: लगभग 55.5 फीट
  • विंगस्पैन: करीब 32.2 फीट
  • मैक्स टेकऑफ वेट: ~19,227 किग्रा
  • ऑपरेटिंग छमता: 50,000 फीट तक
  • कॉम्बैट रेंज: ~550 किमी (मिशन पैटर्न पर निर्भर)
  • फुल रेंज: ~1,850 किमी
  • शीघ्रतम गति: ~2,205 km/hr
  • इंटर्नल फ्यूल: ~4,950 लीटर (ड्रॉप टैंक्स से रेंज बढ़ती है)

हथियार क्षमता और पेलोड

  • एक DSH-23 गन (बॉडी‑माउंटेड) और 11 हार्डपॉइंट्स.
  • हवा‑से‑हवा मिसाइलें, हवा‑से‑जमीन मिसाइलें (जैसे KD‑88 टाइप स्टैंडऑफ मिसाइल), एंटी‑रेडिएशन मिसाइलें (YJ‑91 इत्यादि).
  • लेजर‑निर्देशित बम, ग्लाइड/सैटेलाइट‑गाइड बम और अनगाइडेड रॉकेट पॉड्स की तैनाती संभव.
  • ये क्षमताएँ इसे मल्टी‑रोल ऑपरेशन्स के लिए उपयुक्त बनाती हैं—हालांकि वास्तविक युद्ध‑स्थिति में संवेदनशीलताएँ और सिस्टम‑इंटीग्रेशन निर्धारक होंगे.

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