पाकिस्तान ने अपनी सैन्य तैयारी को नया रूप देते हुए ‘पाकिस्तान आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड’ के गठन का ऐलान किया है. इस घोषणा को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में आयोजित ‘मार्का-ए-हक’ समारोह में किया. नई फोर्स का मकसद बड़ी संख्या में पारंपरिक (कन्वेंशनल) मिसाइल और रॉकेट तैनात करना है, जिसमें ‘फतह’ सीरीज समेत कई उन्नत मिसाइल सिस्टम शामिल किए जाएंगे.
भारत द्वारा संचालित ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सैन्य सोच को हिला कर रख दिया. इस अभियान में भारतीय सेना ने सटीक निशाना साधते हुए आतंकवादी ठिकानों पर करारी चोट की थी. आधुनिक हथियार, उन्नत मिसाइल प्रणाली और रणनीतिक कौशल के मेल ने पाकिस्तान को यह एहसास दिलाया कि अब उसे अपनी सैन्य क्षमता में नए कदम उठाने ही होंगे.
नई रॉकेट फोर्स की भूमिका
पाकिस्तान की यह नई रॉकेट फोर्स, उसकी मौजूदा आर्मी स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड (ASFC) के समानांतर कार्य करेगी. फर्क इतना होगा कि इसमें परमाणु हथियार नहीं, बल्कि केवल पारंपरिक मिसाइलें और रॉकेट तैनात किए जाएंगे. सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भारत की ब्रह्मोस, पृथ्वी और अग्नि जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के संतुलन के लिए उठाया गया है.
भारत के लिए संदेश
पाकिस्तान का यह निर्णय केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है. ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद पाकिस्तान इस तरह की तैयारियों के जरिए भारत को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, भारत पहले से ही अपनी रक्षा तकनीक को और आधुनिक बनाने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, जिसमें पाकिस्तान के कई आतंकवादी अड्डों को नेस्तनाबूद कर दिया गया और 100 से अधिक आतंकियों का सफाया किया गया. इस अभियान ने न केवल पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, बल्कि दुनिया को यह भी दिखा दिया कि भारत अब किसी भी खतरे का तुरंत और सटीक जवाब देने में सक्षम है.
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