जहां एक ओर पाकिस्तान की आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद कर रही है, वहीं देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की शाही ठाठ-बाट पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सोशल मीडिया से लेकर पाकिस्तानी मीडिया तक इस बात पर तीखी बहस छिड़ी हुई है कि जब देश आईएमएफ के कर्ज पर टिका है, तब क्या प्रधानमंत्री को इतनी महंगी सुविधाएं मिलनी चाहिए?
मामला पाकिस्तान वायुसेना के एक विशेष विमान A-1102 एयरबस 319 से जुड़ा है, जिसे मई 2022 में मानवता की सेवा यानी एयर एम्बुलेंस के तौर पर खरीदा गया था. इस विमान का उपयोग आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और मानव सहायता मिशनों के लिए किया जाना था. जुलाई 2024 में इसी एयरक्राफ्ट की मदद से पर्वतारोही समीना बेग को स्कार्दू से रावलपिंडी लाया गया था. लेकिन अब वही विमान पूरी तरह से प्रधानमंत्री और वीआईपी नेताओं के इस्तेमाल के लिए लक्ज़री जेट में तब्दील कर दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू ने खुद इस रूपांतरण को मंज़ूरी दी, जिसे शहबाज शरीफ की निजी इच्छाओं के अनुरूप कहा जा रहा है.
प्राइवेट बेडरूम और हाई-टेक लाउंज से लैस है जेट
इस एयरक्राफ्ट को पूरी तरह रीडिज़ाइन कर दिया गया है. अब इसमें एक प्राइवेट बेडरूम, हाई-एंड वीआईपी लाउंज और अत्याधुनिक संचार प्रणालियां मौजूद हैं. मकसद सिर्फ एक — प्रधानमंत्री और उनके मेहमानों को लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान अधिक आराम देना. पहले शहबाज शरीफ गल्फस्ट्रीम जेट J-756 का उपयोग किया करते थे, लेकिन अब A-1102 को यूके, अमेरिका और सऊदी अरब जैसे अहम देशों की यात्राओं के लिए रिज़र्व किया गया है.
"रिटर्न गिफ्ट" की भी चर्चा
सूत्रों का दावा है कि शहबाज शरीफ ने एयर चीफ मार्शल का कार्यकाल बढ़ाया और इसके बदले में यह लग्जरी जेट उनकी झोली में डाल दिया गया. हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई बयान नहीं आया है, लेकिन विपक्ष और आम जनता के बीच इस फैसले को लेकर भारी नाराज़गी देखी जा रही है.
भुखमरी में जनता, अय्याशी में हुक्मरान!
देश की आर्थिक स्थिति इस समय नाज़ुक दौर में है. लाखों पाकिस्तानी खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं, बच्चों में कुपोषण की दर भयावह है, और महंगाई ने आम जीवन को जकड़ लिया है. ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा करोड़ों रुपये के विमान में विदेशी दौरे करना जनता को रास नहीं आ रहा. सवाल ये है कि जब देश के पास सस्ती दवाइयों और बच्चों के दूध तक के लिए पैसे नहीं हैं, तो ऐसे लग्जरी खर्च क्या सत्ता में बैठे लोगों की संवेदनहीनता को उजागर नहीं करते?
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