कश्मीर में कैसे पहुंची M4 राइफल? जानें कितना घातक है ये अमेरिकी हथियार; बन रहा आतंकियों की पहली पसंद

Pahalgam Terror Attack: 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया. इस हमले में एक विदेशी नागरिक सहित 26 मासूम लोगों की जान गई. लेकिन इस हमले ने केवल जिंदगियों को नहीं छीना. इसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी है.

Pahalgam Terror Attack how american rifle is supplied in kashmir
Image Source: Social Media

Pahalgam Terror Attack: 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया. इस हमले में एक विदेशी नागरिक सहित 26 मासूम लोगों की जान गई. लेकिन इस हमले ने केवल जिंदगियों को नहीं छीना. इसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी है. M4 कार्बाइन असॉल्ट राइफल. घटना स्थल से बरामद यह अमेरिकी मूल की राइफल कोई आम हथियार नहीं, बल्कि आतंकियों के हाथ लगे उस घातक नेटवर्क की कहानी बयां करती है जो अब सिर्फ स्थानीय नहीं, वैश्विक रूप ले चुका है.

अमेरिकन M4 राइफल कहां से आई, कैसे पहुंची?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, M4 राइफलें 2021 में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से वापसी के दौरान पीछे छूटे हथियारों में शामिल थीं. आज ये हथियार पाकिस्तान की मदद से जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठनों तक पहुंच रही हैं. यह सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है. डिफेंस एनालिस्ट्स का मानना है कि "M4 जैसे एडवांस्ड हथियारों का आतंकियों के हाथ लगना सीधे तौर पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की नई चाल को उजागर करता है."

M4 राइफल  क्यों बना यह आतंकियों का पसंदीदा हथियार?

इसके पीछे के कारण की अगर बात की जाए तो ये वजन में हल्की और गैस-ऑपरेटेड, जिससे तेज और निरंतर फायरिंग संभव. फायरिंग रेट: 700 से 970 राउंड प्रति मिनट. रेंज: 500 से लेकर 3600 मीटर तक—यह इसे लंबी दूरी की लड़ाई में प्रभावी बनाता है. नाइट विजन संगतता और स्टील बुलेट फायरिंग क्षमता इसे हर मौसम और परिस्थिति में उपयोगी बनाते हैं. इसकी सटीकता और पोर्टेबिलिटी इसे आतंकी ऑपरेशनों के लिए बेहद खतरनाक हथियार बना देती है.

जम्मू-कश्मीर में M4 की मौजूदगी: एक पैटर्न उभर रहा है

यह पहली बार नहीं है जब आतंकियों के पास से M4 बरामद हुई है. 2017 पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर ताल्हा रशीद मसूद के पास से M4 मिली थी. हाल की घटनाएं  किश्तवाड़ मुठभेड़ में M4 समेत अन्य हथियार बरामद गांदरबल जिले में आतंकियों को M4 राइफल के साथ CCTV में कैद किया गया इन घटनाओं से साफ है कि यह केवल इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक लगातार बढ़ता ट्रेंड है.

अब आगे क्या? भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए चेतावनी

M4 राइफलों की लगातार बढ़ती उपस्थिति न केवल हथियारों की तस्करी को उजागर करती है, बल्कि सीमा पार आतंकवाद के नए स्वरूप को भी दर्शाती है. भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया जाए, इंटेलिजेंस नेटवर्क को रीयल टाइम बनाया जाए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की अवैध तस्करी पर दबाव बनाया जाए

यह भी पढ़े: पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी के वो 70 शब्द, जो पाकिस्तानियों को चीर देंगे, एक्शन तो अब शुरू हुआ है!