भारतीय सेना ने देश में तैयार किए गए 840 वन-वे अटैक ड्रोन खरीदने के लिए 1,577 करोड़ रुपये के अनुबंध किए हैं. ये ड्रोन 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक जाकर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. यह ऑर्डर टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को दिया गया है. सेना को अगले 12 महीनों में इन ड्रोन की आपूर्ति की जाएगी.
इन ड्रोन का इस्तेमाल सीमा पार दुश्मन के गहरे इलाकों में मौजूद तोपों और दूसरे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा.
12 महीने में मिलेंगे 840 ड्रोन
भारतीय सेना ने घरेलू कंपनियों से वन-वे अटैक ड्रोन खरीदने के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत यह अनुबंध किया है. इस प्रक्रिया में कंपनियों को अनुबंध मिलने के छह महीने के भीतर आपूर्ति शुरू करनी होती है.
कुल 840 ड्रोन टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस से लिए जाएंगे. इनमें करीब 64 फीसदी ड्रोन टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की ओर से और बाकी ड्रोन निबे डिफेंस की ओर से दिए जाएंगे.
100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला
इन ड्रोन को 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. सेना इनका इस्तेमाल खास तौर पर सीमा पार गहराई में मौजूद दुश्मन की तोपों की पोजिशन को नष्ट करने के लिए करेगी.
परीक्षण और तकनीकी जांच के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम कीमत वाली बोली लगाने वाली कंपनी रही. वहीं, निबे डिफेंस दूसरे स्थान पर रही.
इन ड्रोन की एक खासियत यह भी है कि इन्हें ऐसे इलाके में काम करने के लिए तैयार किया गया है, जहां दुश्मन की ओर से संचार में रुकावट डालने या गलत संकेत भेजने की कोशिश की जा सकती है.
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
इन कम लागत वाले अटैक ड्रोन को जामिंग और स्पूफिंग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है. इनके डिजाइन में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली सीख को भी शामिल किया गया है.
इन ड्रोन का कठिन परिस्थितियों में कई बार परीक्षण किया गया. इसमें ऐसे हालात भी शामिल थे, जहां उड़ान भरने के समय से ही जामिंग का सामना करना पड़ा.
वन-वे अटैक ड्रोन यानी लोइटरिंग म्यूनिशन अब आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों में भी इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखा गया है.
1,500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाले ड्रोन
भारतीय सेना के लिए ऐसे ड्रोन से जुड़े कई और बड़े ऑर्डर भी प्रक्रिया में हैं. इनमें कुछ ऐसे सिस्टम शामिल हैं, जो 1,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक जाकर लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम होंगे.
फिलहाल खरीदे जा रहे 840 ड्रोन का मुख्य इस्तेमाल सीमा पार गहराई में मौजूद दुश्मन की तोपों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा. इससे सेना की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और मजबूत होगी.