नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए भारत की आर्थिक प्रगति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इनमें अमेरिका और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं.
पीएम मोदी के इस बयान के बाद एफटीए को लेकर चर्चा तेज हो गई है. आखिर एफटीए क्या होता है और इससे भारत के कारोबार, निर्यात और आम लोगों को क्या फायदा मिल सकता है, इसे आसान भाषा में समझते हैं.
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को दुनिया के साथ व्यापार के इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए. उनका जोर इस बात पर था कि भारत में तैयार होने वाले सामान को ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचाया जाए.
उन्होंने कहा कि मशीनरी से लेकर दवाइयों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच पूरी दुनिया में बढ़नी चाहिए. इसके लिए भारत को गुणवत्ता पर ध्यान देने के साथ कम कीमत में बेहतर सामान तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
आखिर एफटीए होता क्या है?
एफटीए यानी मुक्त व्यापार समझौता दो या उससे ज्यादा देशों के बीच होने वाला ऐसा करार है, जिसमें एक-दूसरे के सामान पर लगने वाले आयात शुल्क को कम या खत्म करने पर सहमति बनती है.
इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि भारतीय सामान दूसरे देश में कम कीमत पर पहुंच सके. कीमत कम होने से वहां भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है और इससे निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है.
दूसरी तरफ एफटीए के तहत दूसरे देशों के सामान पर भी भारत में शुल्क कम हो सकता है. इससे विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है.
भारत किन देशों के साथ आगे बढ़ रहा है?
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई देशों और समूहों के साथ व्यापार समझौतों पर काम किया है. मॉरीशस के साथ समझौते के बाद यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों के साथ भी व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई है.
इसके अलावा अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, पेरू, चिली, इजराइल, मालदीव और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ भी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चलती रही है.
हालांकि, किसी समझौते पर बातचीत पूरी होना और उसका पूरी तरह लागू होना अलग-अलग प्रक्रिया है. इसलिए करीब 40 देशों का आंकड़ा समझते समय यह देखना जरूरी है कि कौन सा समझौता लागू हो चुका है और कौन सा अभी बातचीत या मंजूरी के चरण में है.
निर्यात में दिख रहा फायदा
एफटीए वाले बाजारों में भारतीय सामान की पहुंच बढ़ने से निर्यात को फायदा मिलने की उम्मीद रहती है. हाल के आंकड़ों में कई व्यापारिक साझेदारों को भारत के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है.
अप्रैल से जून की तिमाही में सिंगापुर को भारत का निर्यात करीब 101 फीसदी बढ़कर 6.52 अरब डॉलर हो गया. श्रीलंका को निर्यात 124 फीसदी बढ़कर 2.35 अरब डॉलर रहा.
इसी अवधि में आसियान देशों को निर्यात करीब 61.6 फीसदी बढ़कर 14.61 अरब डॉलर और मलेशिया को 75 फीसदी बढ़कर 2.54 अरब डॉलर पहुंच गया. ऑस्ट्रेलिया को निर्यात में भी करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, जापान, ओमान और नेपाल जैसे बाजारों में भी भारत के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
आम लोगों को कैसे फायदा मिल सकता है?
एफटीए का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहता. अगर भारतीय कंपनियों को दूसरे देशों में सामान बेचने के लिए कम शुल्क देना पड़ेगा तो उन्हें नए बाजार मिल सकते हैं. इससे उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
वहीं, भारत में आने वाले विदेशी सामान पर शुल्क कम होने से कुछ उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. लेकिन इसके साथ घरेलू कंपनियों के सामने विदेशी कंपनियों से मुकाबले की चुनौती भी बढ़ सकती है.
यही वजह है कि एफटीए करते समय सरकार को यह संतुलन बनाना होता है कि भारतीय उद्योगों को नए बाजार मिलें, निर्यात बढ़े और घरेलू कंपनियों पर अचानक ज्यादा दबाव न आए.
भारत के लिए क्यों अहम है एफटीए?
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे में निर्यात बढ़ाना उसकी आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा है. ज्यादा देशों के साथ व्यापार समझौते होने से भारतीय कंपनियों को बड़े बाजार मिल सकते हैं.
अगर भारत कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद दुनिया तक पहुंचाने में सफल होता है तो इससे मेड इन इंडिया को बढ़ावा मिल सकता है. खासकर दवा, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और दूसरे विनिर्माण क्षेत्रों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है.
यानी एफटीए सिर्फ टैक्स कम करने का समझौता नहीं है. सही तरीके से लागू होने पर यह भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोल सकता है, निर्यात बढ़ा सकता है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है.