बीजिंग: चीन ने वैश्विक सुरक्षा स्थिति पर अपनी रिपोर्ट 2025 जारी करते हुए दक्षिण एशिया के हालात पर अहम टिप्पणी की है. चीन के विदेश मंत्रालय के अधीन चीन अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान द्वारा तैयार इस 88 पन्नों की रिपोर्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अस्थिरता और अपनी ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव (GSI) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई है. 21 अप्रैल 2026 को जारी इस दस्तावेज में भारत का कई बार उल्लेख किया गया है और इसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी महत्वपूर्ण दावा किया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच दो दशकों में सबसे गंभीर सैन्य टकराव देखने को मिला. इसी संदर्भ में चीन ने यह स्वीकार किया है कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों के नजदीक हमले किए थे. दस्तावेज में पाकिस्तान के कैराना हिल्स का जिक्र करते हुए बताया गया है कि भारतीय हमले कथित तौर पर उन सुरंगों के प्रवेश बिंदुओं के आसपास केंद्रित थे, जहां परमाणु भंडारण से जुड़ी संरचनाएं मौजूद बताई जाती हैं. इसके अलावा, सरगोधा एयरबेस के पास भी भारतीय कार्रवाई का उल्लेख किया गया है, जिसे परमाणु ब्लैकमेलिंग के खिलाफ कदम के तौर पर देखा गया.
भारत-अमेरिका रिश्तों पर भी टिप्पणी
रिपोर्ट में भारत और अमेरिका के बढ़ते सामरिक संबंधों पर भी बात की गई है. इसमें कहा गया है कि भले ही इस साल QUAD शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो पाया, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है. अमेरिकी रक्षा मंत्री की ओर से भी यह दोहराया गया कि रणनीतिक सहयोग के मामले में भारत वाशिंगटन का प्रमुख साझेदार बना हुआ है. चीन इस मंच को अपने खिलाफ बने समूह के रूप में देखता है.
ऑपरेशन सिंदूर और बढ़ता तनाव
चीन की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में तनाव उस समय और बढ़ गया जब 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हमला हुआ. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल था.
इसके बाद 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू की. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने भी इसका जवाब दिया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया. हालांकि 10 मई की शाम तक दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई और सैन्य कार्रवाई रोक दी गई.
परमाणु टकराव की आशंका पर चिंता
चीन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई है कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं, ऐसे में उनके बीच किसी भी सैन्य संघर्ष के परमाणु टकराव में बदलने का खतरा बना रहता है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया.
ऑपरेशन सिंदूर क्या था
भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 की रात पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे. इस कार्रवाई में बहावलपुर, मुरीदके, सियालकोट, बरनाला, कोटली और मुजफ्फराबाद समेत कुल नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों का उद्देश्य आतंकी ढांचे को नुकसान पहुंचाना और हमले का जवाब देना था.
इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों और नागरिक इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को काफी हद तक विफल कर दिया. बाद में भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कई अहम एयरबेस को निशाना बनाया, जिनमें रावलपिंडी के पास नूर खान एयरबेस और रहीमयार खान बेस शामिल थे. इन हमलों से पाकिस्तान के कुछ सैन्य कमांड सिस्टम प्रभावित होने की बात भी सामने आई.
ये भी पढ़ें- US Iran War: ईरान जंग में खाली हो रहा अमेरिका का खजाना, खर्च किए 25 अरब डॉलर, फिर भी नहीं मिली जीत