US Iran War: ईरान जंग में खाली हो रहा अमेरिका का खजाना, खर्च किए 25 अरब डॉलर, फिर भी नहीं मिली जीत

ईरान के साथ चले संघर्ष में अमेरिका को भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के शीर्ष वित्तीय अधिकारी ने संसद की एक समिति के सामने खुलासा किया कि अब तक इस युद्ध पर करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं.

America spent 25 billion dollars in war with Iran Pentagon Report
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

US Iran War: ईरान के साथ चले संघर्ष में अमेरिका को भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के शीर्ष वित्तीय अधिकारी ने संसद की एक समिति के सामने खुलासा किया कि अब तक इस युद्ध पर करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक, इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद अमेरिका को कोई स्पष्ट जीत हासिल नहीं हुई है, जिससे इस पूरे अभियान पर सवाल उठने लगे हैं.

प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई के दौरान युद्ध मामलों के वित्त विभाग के कार्यवाहक अवर सचिव जूल्स हर्स्ट तृतीय ने बताया कि कुल खर्च का बड़ा हिस्सा हथियारों और गोला-बारूद पर किया गया. इसके अलावा सैन्य अभियानों को जारी रखने, उपकरणों के रखरखाव और क्षतिग्रस्त संसाधनों के प्रतिस्थापन पर भी भारी रकम खर्च हुई है. उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय तक चले इस अभियान ने अमेरिकी सैन्य बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है.

अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि इतनी बड़ी लागत के बावजूद रणनीतिक तौर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके. राजनीतिक स्तर पर भी इस खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इसे नेतृत्व के फैसलों से जोड़कर देखा जा रहा है.

ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर

उधर, इस संघर्ष का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है. देश की राष्ट्रीय मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से कमजोर हुई है और बुधवार को यह गिरकर करीब 18 लाख रियाल प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई. यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष के बाद लागू युद्धविराम अभी भी जारी है.

जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के दौरान कई हफ्तों तक रियाल अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा था. इसकी एक वजह यह भी रही कि उस समय देश में व्यापारिक गतिविधियां और आयात काफी सीमित हो गए थे. हालांकि, बीते दो दिनों में अचानक गिरावट का दौर शुरू हुआ और बुधवार तक रियाल ने रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया.

ईरान में बढ़ सकता है आर्थिक संकट

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रियाल की कमजोरी आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती है. ईरान में खाद्य पदार्थ, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा माल जैसे कई जरूरी उत्पाद आयात पर निर्भर हैं, जिनकी कीमतें डॉलर के मुकाबले तय होती हैं. ऐसे में मुद्रा के कमजोर होने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.

फिलहाल युद्धविराम कायम है, लेकिन अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध और नाकाबंदी ईरान की पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर रहे हैं. खासतौर पर तेल निर्यात में आई रुकावट ने सरकार की आय और विदेशी मुद्रा के प्रमुख स्रोत को प्रभावित किया है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियां और गहराने की आशंका जताई जा रही है.

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