Brahmos Missile: भारत और वियतनाम के बीच सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के सौदे की संभावना अब हकीकत बनने जा रही है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान इस समझौते पर दस्तखत किए जाने की उम्मीद है. यह सौदा भारत और वियतनाम के बीच सैन्य सहयोग को एक नई दिशा देगा और दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा.
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम 5 से 7 मई तक भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर होने वाली इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी. राष्ट्रपति लाम के साथ वियतनाम के कई मंत्री और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है, जो मुंबई में आर्थिक समझौतों पर वार्ता करेगा. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक दशक को पूरा करना है, जिसे 2016 में पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान मजबूत किया गया था.
तो लाम, वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति दोनों पदों पर आसीन हैं. वह दशकों में वियतनाम के सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे हैं. राष्ट्रपति बनने के बाद उनका इतनी जल्दी भारत आना, यह दर्शाता है कि हनोई अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए नई दिल्ली को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है.
ब्रह्मोस मिसाइल का सामरिक महत्व
प्रस्तावित सौदे में ब्रह्मोस मिसाइल का तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण शामिल है, जो वियतनाम की दक्षिण चीन सागर में रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा. यह सौदा न केवल वियतनाम की समुद्री सुरक्षा में इजाफा करेगा, बल्कि भारत और वियतनाम के सैन्य सहयोग को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा. रूस ने इस सौदे को अपनी मंजूरी दे दी है, और ब्रह्मोस मिसाइल, जिसे भारत और रूस ने मिलकर विकसित किया है, अब वियतनाम की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा.
ब्रह्मोस का विस्तार
फिलीपीन को ब्रह्मोस मिसाइल देने के बाद, वियतनाम तीसरा बड़ा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश होगा, जो इस शक्तिशाली मिसाइल प्रणाली को प्राप्त करेगा. इससे पहले, इंडोनेशिया ने भी ब्रह्मोस मिसाइलों को खरीदने का समझौता किया था. इस तरह के सामरिक निर्णय दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होंगे.
भारत और वियतनाम के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी
भारत और वियतनाम के बीच ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा एक रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, जो दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा. यह सौदा न केवल वियतनाम की रक्षा क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय रक्षा उद्योग की मजबूत उपस्थिति भी सुनिश्चित करेगा.
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