No Kings Protests: अमेरिका में एक बार फिर ‘नो किंग्स’ (No Kings) नाम से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है. शनिवार को देशभर में लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ईरान के साथ जारी संघर्ष के खिलाफ आवाज उठाई.
यह इस अभियान का तीसरा चरण है, जो पहले भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों के विरोध में आयोजित किया जा चुका है. इस बार प्रदर्शन का दायरा और भी व्यापक रहा और इसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों के साथ-साथ कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं.
3,000 से ज्यादा कार्यक्रम
प्रदर्शन आयोजकों के मुताबिक, यह एक सुनियोजित राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे अमेरिका में 3,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.
सबसे बड़ी रैली सेंट पॉल स्थित स्टेट कैपिटल में हुई, जहां करीब 2 लाख लोग जुटे. मिनेसोटा इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया.
किन मुद्दों पर हो रहा विरोध
प्रदर्शनकारियों का मुख्य निशाना ट्रंप सरकार की सख्त आव्रजन नीतियां और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रही.
लोगों का कहना है कि सरकार के फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और देश को एक अलग दिशा में ले जा रहे हैं. कई जगहों पर लोग पोस्टर और बैनर लेकर सड़कों पर उतरे, वहीं कुछ स्थानों पर सार्वजनिक चौराहों पर इकट्ठा होकर नारेबाजी की गई.
देशभर के बड़े शहरों में प्रदर्शन
सिर्फ मिनेसोटा ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी, लॉस एंजिल्स, शिकागो और सैन फ्रांसिस्को जैसे प्रमुख शहरों में भी हजारों लोग सड़कों पर उतरे.
प्रदर्शनकारियों ने “अमेरिका में कोई राजा नहीं होता” जैसे नारे लगाते हुए लोकतंत्र की रक्षा की बात कही.
राजनेताओं और हस्तियों की मौजूदगी
इस आंदोलन में कई बड़े नेता और सांस्कृतिक हस्तियां भी शामिल हुईं. टिम वॉल्ज ने सेंट पॉल की रैली में लोगों को संबोधित किया.
इसके अलावा ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने कार्यक्रम में प्रस्तुति दी. प्रदर्शन में बर्नी सैंडर्स, जोन बेज, मैगी रोजर्स और जेन फोंडा जैसी हस्तियां भी शामिल रहीं.
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