इंडो-पैसिफिक इलाके में सैन्य ताकत के समीकरण बदलने वाले हैं. अमेरिकी नौसेना का एक नया और महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मंजूरी के करीब है, जिससे इस क्षेत्र में सैन्य संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा और इसका सकारात्मक प्रभाव भारत पर भी होगा. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने लंबे इंतजार के बाद उस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत नेवी के लिए अगली पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट विकसित किया जाएगा. पेंटागन इस सप्ताह उस कंपनी का नाम भी घोषित करेगा, जो इस अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट को अंजाम देगी.
यह प्रोजेक्ट अमेरिका की चीन के सैन्य विस्तार को रोकने की रणनीति का केंद्र बिंदु माना जा रहा है. वर्षों के इंतजार के बाद अमेरिका एक बार फिर इंडो-पैसिफिक में अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
F/A-XX: सुपर हॉर्नेट का नया विकल्प
यह नया विमान F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट का विकल्प होगा, जो लगभग तीन दशक से अमेरिकी नेवी की सेवा में है. नई जेट 2030 के दशक में फ्लाइट में आएगी और तब सुपर हॉर्नेट की सेवा 2040 के दशक तक जारी रहेगी. हालांकि, अभी तक पेंटागन और नेवी ने इस प्रोजेक्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसमें देरी हुई या फंडिंग में कमी आई तो नेवी के पास 2030 के दशक में कोई आधुनिक कैरियर-बेस्ड फाइटर नहीं होगा. इससे चीन के खिलाफ उसकी सैन्य शक्ति कमजोर पड़ सकती है.
चीन के बढ़ते खतरे के बीच क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
चीन ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ाया है, खासकर स्टील्थ फाइटर्स J-20 और J-35 के साथ-साथ अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों के जरिए अमेरिकी नौसेना को चुनौती दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप पर काम कर रहा है. ऐसे में अमेरिका के लिए जरूरी हो गया है कि वह अपनी नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के फाइटर जेट लाए, जो लंबी दूरी तक प्रभावी सैन्य कार्रवाई कर सके, खासकर ताइवान स्ट्रेट और साउथ चाइना सी जैसे संवेदनशील इलाकों में.
क्या खास होगा नया जेट?
यह छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान होगा जो F-35C के साथ मिलकर काम करेगा. इसके मुख्य काम होंगे: प्राइमरी सरफेस अटैक और सेकेंडरी एयर सुपीरियॉरिटी. नेवी की प्राथमिकताएं स्पीड और भारी पेलोड पर केंद्रित हैं. इसके कुछ प्रमुख फीचर्स होंगे: एडवांस्ड स्टील्थ टेक्नोलॉजी: रडार से छुपाव के लिए नवीनतम मटेरियल्स और ब्रॉडबैंड, इंफ्रारेड स्टील्थ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, जिससे चीन के J-20 और J-35 को काउंटर किया जा सके.
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
अमेरिकी कंपनी बोइंग और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन दोनों इस परियोजना में शामिल हैं, जिनके पास B-2 और B-21 जैसे स्टील्थ जेट बनाने का अनुभव है. जिस भी कंपनी को यह प्रोजेक्ट मिलेगा, उसे इसे जल्द पूरा करना होगा, क्योंकि अभी डिजाइनिंग के चरण में भी यह काम शुरू नहीं हुआ है. भारत के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए खास है क्योंकि QUAD गठबंधन के सदस्य होने के नाते अमेरिका के इस अगली पीढ़ी के फाइटर जेट से इंडो-पैसिफिक में सामरिक संतुलन कायम रहेगा. इससे चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मुकाबले भारत को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी.
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान के साथ खतरनाक मिसाइल की डील कर रहा अमेरिका... क्या भारत की बढ़ेगी टेंशन?