तख्तापलट... नेपाल में भी बांग्लादेश जैसे हाल, सड़कों पर उतरी जनता की ये पांच मागें

नेपाल की सड़कों पर इन दिनों असंतोष की आग सुलग रही है. राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में हजारों लोग एक ही नारे के साथ उमड़ रहे हैं — “सरकार हटाओ, देश बचाओ.” विशेषज्ञों की मानें तो हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि देश में बांग्लादेश जैसी सत्ता पलट की स्थिति बनती नजर आ रही है.

Nepal Prtoest situation is like just bangladesh demanding these five things
Image Source: Social Media

नेपाल की सड़कों पर इन दिनों असंतोष की आग सुलग रही है. राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में हजारों लोग एक ही नारे के साथ उमड़ रहे हैं — “सरकार हटाओ, देश बचाओ.” विशेषज्ञों की मानें तो हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि देश में बांग्लादेश जैसी सत्ता पलट की स्थिति बनती नजर आ रही है.

पिछले कुछ दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शनों ने अब उग्र रूप ले लिया है. जनता का गुस्सा सरकार की तानाशाही नीतियों, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और जवाबदेही के अभाव को लेकर है. खासतौर पर सोशल मीडिया बैन के खिलाफ भड़का यह जन आंदोलन अब सीधे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सत्ता को चुनौती दे रहा है.

"अब आपकी सत्ता खत्म" सड़कों से गूंज रही है नई क्रांति की आवाज

प्रदर्शनकारियों के तेवर अब स्पष्ट हैं वे प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे से कम पर मानने को तैयार नहीं. एक प्रदर्शनकारी ने कैमरे के सामने कहा “आपको हमने चुना था, लेकिन अब नहीं चाहते. आपने हमारे बच्चों पर गोलियां चलाईं. अब हम वो सत्ता वापस ले रहे हैं, जो हमने आपको दी थी.” यह गुस्सा केवल सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे राजनीतिक ढांचे के खिलाफ विद्रोह जैसा प्रतीत हो रहा है.

जनता की 5 प्रमुख मांगें, जो अब आंदोलन का एजेंडा बन चुकी हैं. संसद तत्काल भंग की जाए, सभी मौजूदा सांसदों को इस्तीफा देना चाहिए, प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश देने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए, जनता के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाए.

निष्पक्ष और शीघ्र चुनाव कराए जाएं.

इन मांगों के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो रहा है, जिसमें लिखा गया है. “हमने लोकतंत्र मांगा था, आपने हमें डर और भ्रष्टाचार दिया. अब हर छीनी हुई उम्मीद के लिए, हर निर्दोष जान के लिए हम खड़े हैं. अब आपकी सत्ता हमारे वोट से खत्म होगी.”

21 की मौत, फिर भी नहीं थम रहा जनसैलाब

सोमवार को काठमांडू सहित कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिनमें अब तक कम से कम 21 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. सोशल मीडिया बैन को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीतिक संकट में बदल चुका है. हालांकि, सरकार ने देर रात बैन वापस ले लिया, लेकिन इससे जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ. लोगों का कहना है कि अब मुद्दा सिर्फ इंटरनेट नहीं, जन-विश्वास, लोकतंत्र और जीवन की सुरक्षा का है.

अब मांग है  चुनाव हो, नया नेतृत्व आए

जनता के इस आंदोलन का अब स्पष्ट संदेश है — “नई पीढ़ी को मौका दो, पुरानी राजनीति को हटाओ.” विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि वे नया सिस्टम, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं.

एक युवा प्रदर्शनकारी का कहना था:

“हम सिर्फ सोशल मीडिया नहीं, अपने भविष्य की आज़ादी मांग रहे हैं. नेता ऐश कर रहे हैं, हम बेरोजगार मर रहे हैं. यह कब तक चलेगा?”

सरकार की अपील — प्रदर्शन वापस लें, लेकिन असर नहीं

प्रधानमंत्री कार्यालय से बयान आया है कि "सरकार सभी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, कृपया प्रदर्शन स्थगित करें." मगर धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा. आज यानी 9 सितंबर को संसद भवन के बाहर फिर से हजारों की भीड़ जमा हो रही है. “ओली हटाओ, लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारे फिर से गूंजने लगे हैं.

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