नायब सैनी होंगे हरियाणा के नए CM- विधायक दल की मीटिंग में फैसला, जानें क्यों हुआ ये बदलाव

नायब सैनी होंगे हरियाणा के नए CM- विधायक दल की मीटिंग में फैसला, जानें क्यों हुआ ये बदलाव

चंडीगढ़ : हरियाणा में सियासी हलचल के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हरियाणा में नायब सैनी को मनोहर लाल खट्टर की जगह नये मुख्यमंत्री को बनाने का फैसला किया है. विधायक दल की मीटिंग में पार्टी ने यह फैसला लिया है.

गौरतलब है कि नायब सैनी हरियाणा में अभी भाजपा के अध्यक्ष हैं और कुरुक्षेत्र से अभी पार्टी के सांसद हैं. उन्हें हरियाणा में भाजपा का अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का चेहरा माना जाता है. 

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इसलिए बदल रही बीजेपी हरियाणा में सरकार

हरियाणा में 6 महीने बाद विधानसभा का चुनाव होना है, जिसके पहले भाजपा ने राज्य का सीएम बदलने का फैसला किया है. अभी पार्टी निर्दलीय विधायक के दम पर सरकार बनाना चाहती है. 

दरअसल जेजेपी को जाट वोटरों की पार्टी माना जाता है. इसके अलावा जाटों का वोट इनेलो और कांग्रेस को भी मिलता है. ऐसे में भाजपा की रणनीति है कि जेजेपी को अगर गठबंधन से अलग कर दिया जाए तो जाट वोट बंट जाएगा, जिसका अभी होने जा रहे लोकसभा चुनाव 2024 में और आने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भी फायदा होगा. 

इस रणनीति से जाटों के चार हिस्से में बंटने की उम्मीद है. तो वहीं गैर-जाट वोटों के जरिए भाजपा फिर से सरकार बना लेगी. पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी यह बात कही है. उन्होंने इसे वोट काटने की रणनीति बताया है. 

ये है हरियाणा विधानसभा में सीटों का हाल

गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं. भाजपा 2019 के चुनाव में कुल 41 सीटें हासिल की थी, जो कि जादुई आंकड़ा 46 का होता है. वहीं राज्य 7 सीटें निर्दलियों को मिली हैं, जो भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार हैं. लिहाजा भाजपा जेजेपी के बिना भी सरकार बना लेगी. 

दरअसल भाजपा-जजपा के अलगाव का कारण 45 मिनट की मीटिंग वजह बनी है. सोमवार को जेजेपी अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले. उनसे मिलकर उन्होंने भिवानी, महेंद्रगढ़ और हिसार की 3 लोकसभा सीटों की मांग की. 

हिसार में हाल ही में चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली है. 

लेकिन इस बैठक में नड्डा ने दुष्यंत को साफतौर से एक भी सीट देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हम आपसे अलग होकर भी राज्य की सभी 10 लोकसभा सीटें जीत लेंगे. इसके बाद दुष्यंत चौटाला ने अमित शाह से मुलाकात करनी चाही, लेकिन उन्हें उनके ऑफिस से मिलने का समय नहीं दिया गया. इसके बाद मनोहर लाल खट्टर ने मीटिंग बुलाई और निर्दलियों का समर्थन हासिल करके राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया. 

खबर समाप्त हुई.

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