National Overseas Scholarship 2026: विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई करना हर साल हजारों भारतीय छात्रों का सपना होता है, लेकिन महंगी ट्यूशन फीस और रहने-खाने का खर्च अक्सर इस सपने के बीच सबसे बड़ी बाधा बन जाता है. ऐसे छात्रों को आर्थिक सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (National Overseas Scholarship-NOS) योजना शुरू की है. इस योजना के तहत योग्य छात्रों को विदेश में मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि आर्थिक स्थिति उनकी उच्च शिक्षा में रुकावट न बने. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन की तारीखें जानना है जरूरी
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 से शुरू हो गई है. इच्छुक उम्मीदवार 2 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं. यदि आवेदन भरते समय किसी प्रकार की गलती हो जाती है तो उसे सुधारने का मौका भी दिया जाएगा. आवेदन में संशोधन की सुविधा 4 जून से 7 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगी. ऐसे में अभ्यर्थियों को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए.
क्या है नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना?
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को विदेश की प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटीज में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है. यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), विमुक्त एवं घुमंतू जनजाति (DNT), भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है. इसके माध्यम से प्रतिभाशाली छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा हासिल करने में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है.
पढ़ाई से लेकर यात्रा तक का खर्च उठाती है सरकार
इस स्कॉलरशिप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें विदेश में पढ़ाई से जुड़े लगभग सभी प्रमुख खर्चों को सरकार वहन करती है. छात्रों की यूनिवर्सिटी की ट्यूशन फीस के अलावा रहने और खाने के लिए वार्षिक मेंटेनेंस अलाउंस भी दिया जाता है. इसके साथ मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क और आने-जाने के लिए इकोनॉमी क्लास हवाई टिकट का खर्च भी योजना के अंतर्गत शामिल है. पढ़ाई के दौरान जरूरी शैक्षणिक जरूरतों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे छात्र बिना आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें.
कौन-कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना का लाभ केवल निर्धारित पात्रता रखने वाले छात्र ही उठा सकते हैं. अनुसूचित जाति, डीएनटी, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर वर्ग के आवेदकों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) के अभ्यर्थियों के लिए आय सीमा 6 लाख रुपये प्रतिवर्ष तय की गई है. आवेदन करने वाले उम्मीदवार की आयु 35 वर्ष से कम होनी चाहिए. इसके अलावा छात्र के पास किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से मास्टर्स या पीएचडी पाठ्यक्रम में बिना शर्त प्रवेश (Unconditional Admission Offer) होना अनिवार्य है. आमतौर पर विश्व की शीर्ष 500 रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज में प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है.
हर साल सीमित सीटों पर मिलता है मौका
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के तहत प्रत्येक वर्ष कुल 125 छात्रों का चयन किया जाता है. इनमें 115 सीटें अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए निर्धारित हैं, जबकि 6 सीटें डीएनटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहती हैं. इसके अलावा 4 सीटें भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के छात्रों को दी जाती हैं. योजना में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुल सीटों में 30 प्रतिशत आरक्षण महिला अभ्यर्थियों के लिए भी निर्धारित किया गया है.
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