Myanmar Earthquake: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में रविवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NSC) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.5 दर्ज की गई. भूकंप सुबह करीब 6 बजकर 33 मिनट पर आया और इसका केंद्र जमीन के भीतर लगभग 130 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है. भूकंप के झटके महसूस होते ही कुछ इलाकों में लोग घबरा गए. हालांकि, इसकी तीव्रता कम होने और केंद्र की गहराई अधिक होने की वजह से अधिकांश लोगों को इसका एहसास नहीं हुआ. राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है.
EQ of M: 3.5, On: 16/08/2026 06:33:09 IST, Lat: 24.783 N, Long: 94.887 E, Depth: 130 Km, Location: Myanmar.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) August 16, 2026
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जमीन के अंदर 130 किलोमीटर गहराई में था केंद्र
म्यांमार में आया यह भूकंप सतह से काफी नीचे उत्पन्न हुआ. भूकंप की गहराई उसके प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सामान्य तौर पर जितना गहरा भूकंप होता है, सतह पर उसका असर कई परिस्थितियों में उतना कम महसूस हो सकता है, हालांकि प्रभाव केवल गहराई से तय नहीं होता. वैज्ञानिक भूकंपों को उनकी गहराई के आधार पर उथले, मध्यवर्ती और गहरे भूकंपों में वर्गीकृत करते हैं. सतह से करीब 70 किलोमीटर तक की गहराई में आने वाले भूकंपों को उथला माना जाता है. 70 से 300 किलोमीटर की गहराई वाले भूकंप मध्यवर्ती श्रेणी में आते हैं, जबकि 300 से 700 किलोमीटर तक की गहराई वाले भूकंपों को गहरे भूकंप की श्रेणी में रखा जाता है.
आखिर कहां और क्यों आते हैं भूकंप?
भूकंप पृथ्वी की सतह तक सीमित घटना नहीं है. धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल और उनके बीच होने वाली ऊर्जा के अचानक रिलीज होने से भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं. यही तरंगें धरती की सतह पर झटकों के रूप में महसूस होती हैं. पृथ्वी की सतह से लेकर करीब 700 किलोमीटर तक की गहराई में भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं. भूकंप की तीव्रता, उसका केंद्र, गहराई और स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियां यह तय करती हैं कि किसी क्षेत्र में इसका प्रभाव कितना महसूस होगा.
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है म्यांमार
म्यांमार दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के उन क्षेत्रों में शामिल है जहां भूकंपीय गतिविधियां अक्सर देखने को मिलती हैं. देश की भौगोलिक स्थिति इसे कई सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों और फॉल्ट प्रणालियों के प्रभाव क्षेत्र में रखती है. म्यांमार के आसपास भारतीय प्लेट, यूरेशियन प्लेट, सुंडा प्लेट और बर्मा माइक्रोप्लेट से जुड़ी भूगर्भीय गतिविधियां क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को प्रभावित करती हैं. देश से होकर गुजरने वाली सागाइंग फॉल्ट भी लंबे समय से वैज्ञानिकों के अध्ययन का विषय रही है. यही वजह है कि म्यांमार और इसके आसपास के इलाकों में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं.
समुद्र से जुड़े इलाकों में सुनामी का भी खतरा
म्यांमार का लंबा समुद्री तट भी उसकी प्राकृतिक आपदा संबंधी संवेदनशीलता को बढ़ाता है. समुद्र के नीचे आने वाले शक्तिशाली भूकंप कुछ परिस्थितियों में सुनामी पैदा कर सकते हैं. हालांकि, हर समुद्री भूकंप सुनामी का कारण नहीं बनता और इसके लिए भूकंप की तीव्रता, गहराई तथा समुद्र के नीचे प्लेटों की हलचल जैसे कई कारक जिम्मेदार होते हैं. रविवार को आए 3.5 तीव्रता के भूकंप के मामले में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है. ऐसे में फिलहाल लोगों के लिए राहत की स्थिति बनी हुई है.
इंडोनेशिया में लगातार भूकंपों से मची थी तबाही
म्यांमार में आए हल्के भूकंप के बीच इंडोनेशिया में हाल ही में महसूस किए गए शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर दक्षिण-पूर्व एशिया की भूकंपीय संवेदनशीलता की ओर ध्यान खींचा है. पूर्वी इंडोनेशिया के आसपास कुछ ही घंटों में कई भूकंपीय झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई थी. इनमें से एक शक्तिशाली भूकंप के बाद कई इलाकों में भारी नुकसान की खबरें सामने आईं. इमारतों को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा. अधिकारियों ने राहत और बचाव अभियान चलाया और घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई.
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