मुनीर की सेना विदेशी ताकतों के इशारे पर... तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप

Afghanistan Pakistan Relations: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ता एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुँच गया है. इस बार विवाद की आग तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद के बयान से भड़की, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार की अक्षमता और नाकामी को सीधे तौर पर उजागर किया.

Munir army behest of foreign powers Taliban made serious allegations against Pakistan
Image Source: Social Media

Afghanistan Pakistan Relations: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ता एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुँच गया है. इस बार विवाद की आग तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद के बयान से भड़की, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार की अक्षमता और नाकामी को सीधे तौर पर उजागर किया. मुजाहिद ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन पाकिस्तान की ज़मीन और हवाई क्षेत्र से होकर अफगानिस्तान में घुसते हैं, और पाकिस्तान उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है. उनका यह बयान न सिर्फ़ पाकिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ती कड़वाहट का संकेत भी है.

TOLOnews को दिए इंटरव्यू में मुजाहिद ने साफ कहा कि पाकिस्तान को सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी ज़मीन और हवा का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ न हो. उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा, “पाकिस्तान हमेशा कहता है कि अफगान मिट्टी का इस्तेमाल उसके खिलाफ न हो, लेकिन अब हम भी यही मांग कर रहे हैं. तुम्हारी जमीन और हवा का इस्तेमाल हमारे खिलाफ न हो.” मुजाहिद ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की अक्षमता पर सवाल उठाते हुए इसे उसकी कमजोरी और लाचारी बताया.

पर्दे के पीछे अस्थिरता फैलाने की कोशिश

मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना का कुछ हिस्सा विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि बड़ी ताकतें, जो कभी अफगानिस्तान में मौजूद थीं, अब पर्दे के पीछे एजेंटों के जरिए हालात बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं. उनका मकसद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाना है. तालिबान अमेरिका और उसके सहयोगियों पर शक कर रहा है कि उन्होंने पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान में फिर से घुसपैठ शुरू कर दी है.

“तुम्हारी समस्या, हमारा सिरदर्द नहीं”

तालिबान और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा विवाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर है. पाकिस्तान चाहता है कि अफगान तालिबान TTP को नियंत्रित करे, लेकिन मुजाहिद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि TTP पाकिस्तान की समस्या है, अफगानिस्तान की नहीं. तालिबान ने साफ किया कि वह अपने इलाके से किसी देश पर हमला नहीं होने देगा, लेकिन पाकिस्तान अब अपनी समस्याओं को अफगानिस्तान पर थोपने की कोशिश कर रहा है.

दो मोर्चों पर दबाव में पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय दो मोर्चों पर फंसा हुआ है. एक ओर सीमा पर लगातार TTP के हमले जारी हैं, तो दूसरी ओर तालिबान सरकार के बयान से कूटनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है. जिस तालिबान को कभी पाकिस्तान ने रणनीतिक सहयोगी माना था, वही अब उसकी सबसे बड़ी सिरदर्द बन चुका है.

काबुल से कराची तक गूंजा बयान

पाकिस्तानी मीडिया ने तालिबान के इस बयान को अपमानजनक करार दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि यह अब केवल बयानबाज़ी नहीं रह गई, बल्कि दोनों देशों के बीच खुली अविश्वास की दीवार बन चुकी है. तालिबान अब पाकिस्तान को बड़े भाई की तरह नहीं, बल्कि नाकाम पड़ोसी और अप्रत्याशित चुनौती के रूप में देख रहा है.

यह भी पढ़ें- मुनीर के सामने शहबाज की एक नहीं चलती, तालिबान ने खोल दी पो; कहा- दोनों के बीच गहरी अनबन