Parliament Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और इस बार सरकार का एजेंडा कई बड़े सुधारों पर केंद्रित रहने वाला है. केंद्र सरकार इस सत्र में प्रशासनिक व्यवस्था, न्यायपालिका, कर प्रणाली, शिक्षा और छोटे उद्योगों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है. 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में सरकार कुल पांच नए विधेयक पेश करेगी, जबकि विधायी एजेंडे में सात प्रमुख प्रस्तावों को शामिल किया गया है. इन विधेयकों के जरिए सरकार कई पुराने नियमों में बदलाव कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की कोशिश करेगी.
आयकर और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े अहम विधेयक होंगे पेश
मानसून सत्र में सरकार सबसे पहले आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है. इन दोनों विधेयकों का संबंध पहले जारी किए गए अध्यादेशों को स्थायी कानून का रूप देने से है. आयकर कानून में प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य सरकारी कर्ज बाजार को मजबूत करना और विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश का माहौल बेहतर बनाना है. सरकार का मानना है कि इन सुधारों से वित्तीय व्यवस्था में स्थिरता आएगी और पूंजी बाजार को मजबूती मिलेगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक के जरिए जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है. सरकार का कहना है कि इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी.
विदेशी फंडिंग पर और सख्त होगी निगरानी
सरकार विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को मिलने वाली विदेशी सहायता पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है. प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द हो जाता है, संस्था खुद पंजीकरण छोड़ देती है या उसका नवीनीकरण नहीं होता है, तो उसकी विदेशी संपत्ति और फंड सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी के नियंत्रण में आ सकते हैं. सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ेगी और फंड के सही उपयोग को सुनिश्चित किया जा सकेगा.
उच्च शिक्षा में आएगा नया नियामक ढांचा
सरकार उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 के जरिए यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई जैसी अलग-अलग नियामक संस्थाओं की जगह एकीकृत नियामक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है. इस विधेयक का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान और प्रभावी निगरानी प्रणाली तैयार करना है. फिलहाल यह प्रस्ताव संयुक्त संसदीय समिति के पास विचाराधीन है और रिपोर्ट आने के बाद इसे संसद में आगे बढ़ाया जाएगा.
जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमों में होंगे बदलाव
सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए रिकॉर्ड व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी में है. प्रस्तावित बदलावों में देरी से पंजीकरण कराने पर सख्त नियम और जुर्माने का प्रावधान शामिल किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को अधिक सटीक बनाने से सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी.
राष्ट्रीय सम्मान और प्रतीकों की सुरक्षा पर जोर
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों को और प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है. सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को मजबूत करना है.
एमएसएमई को राहत देने की तैयारी
छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 लेकर आ रही है. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य छोटे कारोबारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है. इसके तहत राज्यों को एमएसएमई सुविधा परिषदों के गठन और संचालन में अधिक स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव है, ताकि उद्योगों से जुड़ी शिकायतों का जल्द समाधान हो सके. सरकार का मानना है कि इससे कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी और छोटे उद्योगों को आर्थिक मजबूती मिलेगी.
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर अभी स्थिति साफ नहीं
संसद के मानसून सत्र के शुरुआती एजेंडे में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को शामिल नहीं किया गया है. इन दोनों मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही है. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि संसद सत्र का एजेंडा अंतिम नहीं होता और जरूरत पड़ने पर नए विधेयक भी शामिल किए जा सकते हैं.
संविधान संशोधन विधेयक पर भी रहेगी नजर
मानसून सत्र में 2022-23 के अतिरिक्त अनुदानों की मांग भी पेश की जाएगी. इसके अलावा 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी नजर बनी रहेगी, जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े प्रावधानों का जिक्र है. हालांकि यह विधेयक शुरुआती एजेंडे में शामिल नहीं है, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस पर चर्चा की संभावना बनी हुई है. कुल मिलाकर संसद का आगामी मानसून सत्र सरकार के सुधारवादी एजेंडे के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. टैक्स व्यवस्था, न्यायपालिका, शिक्षा, उद्योग और प्रशासन से जुड़े इन प्रस्तावों पर सदन में व्यापक बहस होने की उम्मीद है.
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