Monsoon Session: आज से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, आठ नए विधेयक पेश करेगी सरकार

Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और शुरुआत से ही इसके काफी हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है.

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Image Source: Sansad TV

Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और शुरुआत से ही इसके काफी हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है. एक ओर केंद्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष कई ऐसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जिन्हें लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस तेज रही है. सर्वदलीय बैठक में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आईं, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है.

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाए कई बड़े मुद्दे

मानसून सत्र शुरू होने से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार के सामने कई संवेदनशील विषय रखे. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित अन्य दलों ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, एथनॉल नीति और अन्य जनहित से जुड़े मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की. विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों का सीधा संबंध जनता से है और सरकार को इन पर जवाब देना चाहिए. वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष से अपील की गई कि संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दिया जाए ताकि महत्वपूर्ण विधायी कार्य समय पर पूरे किए जा सकें.

आठ महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का फोकस

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सत्र के दौरान किसी अतिरिक्त विधायी कार्य की आवश्यकता होगी तो उस पर कार्य मंत्रणा समिति (BAC) में चर्चा की जाएगी और सभी राजनीतिक दलों को समय रहते जानकारी दे दी जाएगी. सरकार का प्रयास रहेगा कि निर्धारित विधेयकों पर बिना बाधा के चर्चा हो और उन्हें पारित कराया जा सके. हालांकि विपक्ष की रणनीति को देखते हुए यह आसान नहीं माना जा रहा है.

इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

विपक्षी दलों ने साफ संकेत दिए हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं इस सत्र का प्रमुख मुद्दा बन सकती हैं. विपक्ष सरकार से इस विषय पर जवाब मांगने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीति की मांग करेगा.

इसके अलावा विभिन्न सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर भी विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है. ऐसे में संसद के भीतर बहस का केंद्र केवल विधेयक ही नहीं बल्कि कई समसामयिक राजनीतिक विषय भी रहेंगे.

महिला आरक्षण और परिसीमन पर होगा राजनीतिक टकराव

महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा भी इस मानसून सत्र में प्रमुख राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कई अन्य विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसकी आड़ में परिसीमन लागू करने के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे. हालांकि परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक अभी सरकार के आधिकारिक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस विषय पर चर्चाएं लगातार जारी हैं.

राज्यसभा में पेश होगा वंदे मातरम् से जुड़ा संशोधन विधेयक

मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार राज्यसभा में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस विधेयक को सदन में प्रस्तुत करेंगे.

इस प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन के दौरान किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करना या उसका अपमान करना दंडनीय अपराध माना जाएगा. यह संशोधन राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में बदलाव के लिए लाया जा रहा है, जिसके तहत पहले से ही राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान मौजूद है.

बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच शुरू हो रहा है सत्र

इस बार मानसून सत्र ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब देश की राजनीति में कई नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं. कुछ विपक्षी दलों में हालिया टूट और राजनीतिक पुनर्संरचना ने संसद के भीतर शक्ति संतुलन को भी प्रभावित किया है. इसके साथ ही सीजेपी के 'चलो संसद मार्च' और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है. इन विषयों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना जताई जा रही है.

खरगे के पत्र के बाद  तेज हुई राजनीतिक हलचल

परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की. विपक्ष का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति आवश्यक है.

दूसरी ओर भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहा है. यही कारण है कि संसद का यह सत्र केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक रणनीतियों और शक्ति प्रदर्शन का भी बड़ा मंच बनने की संभावना है.

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