Monsoon Session 2026: केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा जारी कर दिया है. इस बार सरकार कई अहम सुधारों से जुड़े विधेयकों को संसद में पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है. एजेंडे में विदेशी फंडिंग की निगरानी से लेकर शिक्षा व्यवस्था, आयकर, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और एमएसएमई सेक्टर में सुधार जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं. हालांकि, लंबे समय से चर्चा में रहे महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन इस सूची का हिस्सा नहीं हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा एजेंडा अंतिम नहीं है और जरूरत पड़ने पर सत्र के दौरान नए विधेयक भी शामिल किए जा सकते हैं.
सात अहम विधेयकों पर रहेगा सरकार का फोकस
सरकार द्वारा जारी विधायी एजेंडे में कुल सात प्रमुख विधेयकों को शामिल किया गया है. इन विधेयकों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना, न्यायिक ढांचे में सुधार लाना, शिक्षा प्रणाली में बदलाव करना और उद्योगों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. सरकार चाहती है कि इन प्रस्तावों पर संसद में विस्तृत चर्चा हो और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर इन्हें कानून का रूप दिया जाए.
विदेशी फंडिंग पर होगी और कड़ी निगरानी
विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026 के जरिए सरकार गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को मिलने वाले विदेशी फंड की निगरानी को और सख्त बनाने जा रही है. प्रस्ताव के अनुसार यदि किसी संस्था का एफसीआरए (FCRA) पंजीकरण रद्द हो जाता है, वह स्वयं सरेंडर कर देती है या उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो उसकी विदेशी संपत्ति और फंड सरकार द्वारा नामित अधिकारी के नियंत्रण में आ जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे विदेशी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता आएगी.
उच्च शिक्षा के लिए बनेगा एक नया नियामक ढांचा
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला प्रस्ताव माना जा रहा है. इसके तहत वर्तमान में कार्यरत यूजीसी (UGC), एआईसीटीई (AICTE) और एनसीटीई (NCTE) जैसी अलग-अलग नियामक संस्थाओं की जगह एक एकीकृत नियामक संस्था बनाने की योजना है. यह विधेयक पहले से संयुक्त संसदीय समिति के पास विचाराधीन है और समिति की रिपोर्ट आने के बाद इसे संसद में पारित कराने की कोशिश की जाएगी.
आयकर कानून और सरकारी कर्ज बाजार में सुधार की तैयारी
आयकर (संशोधन) बिल, 2026 का उद्देश्य मौजूदा अध्यादेश का स्थान लेना है. सरकार का कहना है कि इस संशोधन से सरकारी कर्ज बाजार को मजबूती मिलेगी और विदेशी निवेशकों को भारत में लंबे समय तक निवेश के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे पूंजी बाजार में स्थिरता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी न्यायाधीशों की संख्या
सरकार सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव लाई है. इसका उद्देश्य लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद करना और न्यायपालिका पर बढ़ते कार्यभार को कम करना है.
जन्म-मृत्यु पंजीकरण और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े नियम होंगे सख्त
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी होने पर कड़े नियम और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. सरकार का मानना है कि इससे सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक और व्यवस्थित होंगे. वहीं राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) बिल, 2026 के जरिए राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों को और प्रभावी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
एमएसएमई को समय पर भुगतान दिलाने पर रहेगा जोर
एमएसएमई विकास (संशोधन) बिल, 2026 का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्योगों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है. प्रस्ताव के तहत राज्यों को एमएसएमई सुविधा परिषदों के गठन में अधिक स्वतंत्रता दी जाएगी, जिससे उद्योगों की शिकायतों का तेजी से समाधान हो सके और कारोबार करना आसान बने.
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल एजेंडे से बाहर
सरकार के इस विधायी एजेंडे में सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों के शामिल न होने को लेकर हो रही है. फिलहाल सरकार ने इन दोनों प्रस्तावों पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है. हालांकि यह भी कहा गया है कि मौजूदा एजेंडा अंतिम नहीं है और सत्र के दौरान परिस्थितियों के अनुसार नए विधेयक जोड़े जा सकते हैं.
संविधान संशोधन पर भी रहेगी नजर
संसद के आगामी सत्र में वर्ष 2022-23 के अतिरिक्त अनुदानों की मांग भी पेश की जाएगी. वहीं 130वें संविधान संशोधन विधेयक, जिसमें प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को हटाने से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख है, उसे इस प्रारंभिक एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है. हालांकि इस प्रस्ताव पर संयुक्त संसदीय समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे संसद सत्र के दौरान पेश किए जाने की संभावना है. मानसून सत्र में सरकार का फोकस प्रशासनिक सुधार, शिक्षा, न्यायपालिका, कर व्यवस्था और उद्योगों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर रहेगा. ऐसे में यह सत्र कई बड़े नीतिगत फैसलों और राजनीतिक बहसों का केंद्र बनने की संभावना है.
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