Uniform Civil Code Gujarat: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को गुजरात विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया. बिल पेश करते हुए उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि इससे देश में समानता, न्याय और एकता को मजबूती मिलेगी.
भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह बिल सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लाने की दिशा में बड़ा कदम है. उन्होंने नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि देश में पहले भी कई बड़े फैसले लिए गए हैं, जैसे अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक कानून और राम मंदिर का निर्माण. उनके अनुसार, यूसीसी भी उसी दिशा में एक अहम कदम है.
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं, लेकिन अब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो पाई थी. यह बिल उसी कमी को पूरा करने की कोशिश है.
बिल की मुख्य बातें
इस बिल में शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति से जुड़े नियमों को सभी के लिए एक जैसा बनाने का प्रस्ताव है. शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा. जबरन शादी और बहुविवाह पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 7 साल तक की सजा हो सकती है. कोर्ट के बाहर तलाक को मान्य नहीं माना जाएगा और ऐसा करने पर 3 साल तक की सजा हो सकती है.
अगर कोई लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उसे 3 महीने तक की सजा हो सकती है. नाबालिग के साथ लिव-इन के मामलों में POCSO Act के तहत कार्रवाई होगी. इसके अलावा बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर अधिकार देने की भी बात कही गई है.
किन बातों का रखा गया ध्यान
सरकार ने साफ किया है कि यह कानून किसी की परंपरा या संस्कृति को खत्म करने के लिए नहीं है. कुछ समुदायों की खास परंपराओं, जैसे कजिन मैरिज, में कोई बदलाव नहीं किया गया है. साथ ही आदिवासी समुदायों को इस बिल से बाहर रखा गया है.
कांग्रेस ने जताया विरोध
इस बिल को लेकर कांग्रेस ने विरोध किया है. गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि यह बिल जल्दबाजी में लाया गया है और इसे पहले किसी समिति के पास भेजा जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रही है.
उनके मुताबिक, यूसीसी से जुड़ी रिपोर्ट को सदन में पेश नहीं किया गया और विधायकों को इस पर ठीक से चर्चा का मौका भी नहीं मिला. कांग्रेस का यह भी कहना है कि पूरे देश के लिए समान कानून बनाने का अधिकार संसद के पास होता है, ऐसे में राज्य स्तर पर ऐसा बिल लाना कई सवाल खड़े करता है.
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