महाराष्ट्र के बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस भीषण दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की जान चली गई. हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता एक ही चीज बन जाती है—ब्लैक बॉक्स की तलाश.
लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर किसी भी विमान दुर्घटना के बाद ब्लैक बॉक्स को ढूंढना इतना जरूरी क्यों होता है? दरअसल, यही वह उपकरण है जो किसी फ्लाइट के आखिरी पलों की सच्चाई सामने लाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है.
ब्लैक बॉक्स आखिर होता क्या है?
ब्लैक बॉक्स विमान में लगा एक विशेष रिकॉर्डिंग डिवाइस होता है, जो उड़ान से जुड़ी हर जरूरी जानकारी को अपने अंदर सुरक्षित रखता है. दिलचस्प बात यह है कि नाम भले ही “ब्लैक बॉक्स” हो, लेकिन इसका रंग काला नहीं बल्कि चमकीला नारंगी होता है. यह रंग इसलिए चुना जाता है ताकि दुर्घटना के बाद मलबे के बीच इसे आसानी से खोजा जा सके. हर कमर्शियल और चार्टर्ड विमान में ब्लैक बॉक्स अनिवार्य रूप से लगाया जाता है.
दो हिस्सों में काम करता है ब्लैक बॉक्स
ब्लैक बॉक्स असल में एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग रिकॉर्डिंग सिस्टम का संयोजन होता है. पहला हिस्सा CVR (Cockpit Voice Recorder) कहलाता है. इसमें कॉकपिट के अंदर पायलट और को-पायलट के बीच हुई बातचीत, रेडियो कम्युनिकेशन, चेतावनी अलार्म और अन्य आवाजें रिकॉर्ड होती हैं. इन रिकॉर्डिंग्स से यह समझने में मदद मिलती है कि दुर्घटना से ठीक पहले कॉकपिट में क्या स्थिति थी. दूसरा हिस्सा FDR (Flight Data Recorder) होता है. यह विमान के तकनीकी आंकड़ों को रिकॉर्ड करता है. इसमें फ्लाइट की ऊंचाई, गति, दिशा, इंजन की स्थिति, कंट्रोल सिस्टम की गतिविधियां और कई अन्य महत्वपूर्ण डेटा शामिल होते हैं.
क्रैश के बाद भी कैसे सुरक्षित रहता है ब्लैक बॉक्स?
ब्लैक बॉक्स को बेहद मजबूत धातुओं से तैयार किया जाता है. इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यह तेज आग, अत्यधिक तापमान, जबरदस्त दबाव और गहरे पानी में भी खराब न हो. यही वजह है कि विमान पूरी तरह तबाह हो जाने के बावजूद ब्लैक बॉक्स अक्सर सुरक्षित मिल जाता है. दुनिया भर में हुए कई बड़े विमान हादसों की असली वजह ब्लैक बॉक्स से मिले डेटा के जरिए ही सामने आ सकी है.
दुर्घटना की गुत्थी कैसे सुलझाता है ब्लैक बॉक्स?
जब कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो जांच एजेंसियां सबसे पहले ब्लैक बॉक्स को खोजने में जुट जाती हैं. इसके CVR से पायलटों की आखिरी बातचीत और चेतावनियों का विश्लेषण किया जाता है, जबकि FDR से तकनीकी गड़बड़ियों या सिस्टम फेलियर की जानकारी मिलती है. इन दोनों से मिले डेटा को जोड़कर विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या मौसम संबंधी कारणों से हुआ. इसी आधार पर भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए एविएशन नियमों में बदलाव किए जाते हैं.
एविएशन सुरक्षा की रीढ़ है ब्लैक बॉक्स
कह सकते हैं कि ब्लैक बॉक्स सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि हवाई सुरक्षा की रीढ़ है. इसके जरिए न सिर्फ किसी दुर्घटना की सच्चाई सामने आती है, बल्कि भविष्य की उड़ानों को और सुरक्षित बनाने की दिशा भी तय होती है.
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