Magh Mela 2026: प्रयागराज की पावन धरती एक बार फिर श्रद्धा और साधना के रंग में रंगी हुई है. त्रिवेणी संगम के तट पर लगे माघ मेले में देशभर से आए कल्पवासी और श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं. पौष पूर्णिमा के साथ इस महापर्व की शुरुआत हो चुकी है और अब सभी की निगाहें मकर संक्रांति के पवित्र स्नान पर टिकी हैं, जिसे माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान माना जाता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति वर्ष की सबसे विशेष संक्रांतियों में से एक है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं. उत्तरायण काल को देवताओं का समय माना जाता है, इसलिए इस दिन किया गया दान, जप और स्नान विशेष फलदायी होता है. माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान हर वर्ष अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है. मान्यता है कि प्रयागराज के संगम तट पर मकर संक्रांति के दिन गंगा या त्रिवेणी में स्नान करने से हजारों यज्ञों के समान पुण्य की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि इस दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
14 जनवरी को होगा माघ मेले का दूसरा स्नान
इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी. इसी दिन माघ मेले का दूसरा पावन स्नान संपन्न होगा. खास बात यह है कि इस बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जो लगभग 23 वर्षों बाद आया है. इस शुभ संयोग के कारण माघ मेले में स्नान का महत्व और भी बढ़ गया है. प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में स्नान करने का अनुमान लगाया जा रहा है.
मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त
धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति के दिन पुण्य काल और महा पुण्य काल में स्नान को अत्यंत फलदायी माना जाता है.इस वर्ष मकर संक्रांति पर पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, यानी कुल 2 घंटे 32 मिनट.वहीं महा पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 45 मिनट होगी. इस समयावधि में संगम में स्नान करना विशेष शुभ माना गया है.
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का विशेष फल
शास्त्रों में माघ मेले के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को सर्वोत्तम बताया गया है. मान्यता है कि इस समय किया गया स्नान आत्मिक शुद्धि के साथ-साथ विशेष पुण्य प्रदान करता है. मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. जो श्रद्धालु इस समय संगम स्नान करेंगे, उन्हें विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होगा.
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