लिव-इन पर सख्ती, बेटियों को बराबर अधिकार... मध्य प्रदेश में UCC का ड्राफ्ट पेश, जानें क्या है खास

MP UCC Bill: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भारी विरोध और हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) बिल विधानसभा में पेश कर दिया है. सरकार इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं.

Madhya Pradesh UCC Bill From 5 years in jail for living-in while married to equal property rights for daughters
Image Source: Social Media

MP UCC Bill: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भारी विरोध और हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) बिल विधानसभा में पेश कर दिया है. सरकार इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं.

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने बिल को सप्लीमेंट्री सूची के जरिए अचानक पेश किया. विपक्ष के विरोध के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने बिल को सदन के रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है.

अनुसूचित जनजातियों को रखा गया बाहर

प्रस्तावित UCC बिल के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों (ST), कुछ संरक्षित पारंपरिक समुदायों और घुमंतू-अर्धघुमंतू जनजातियों पर यह कानून लागू नहीं होगा.

एक समय में सिर्फ एक शादी की अनुमति

बिल में एक समय में केवल एक विवाह को मान्यता देने का प्रावधान है. इसमें बहुविवाह पर रोक लगाने की बात कही गई है. साथ ही तीन तलाक को भी कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी. इसके अलावा पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल तय की गई है.

मौखिक तलाक को नहीं मिलेगी मान्यता

UCC के तहत मौखिक तलाक या किसी अनौपचारिक पंचायत के फैसले को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. तलाक केवल कानून में बताए गए नियमों के अनुसार ही हो सकेगा.

निकाह हलाला को लेकर प्रावधान

प्रस्तावित कानून में तलाक के बाद दोबारा शादी के लिए निकाह हलाला करवाने या इसे बढ़ावा देने को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया गया है.

शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी

बिल में विवाह और तलाक दोनों का पंजीकरण अनिवार्य करने की बात कही गई है. इससे शादी और तलाक से जुड़े रिकॉर्ड को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जा सकेगा.

सभी बच्चों को मिलेगा बराबर अधिकार

UCC में ‘अवैध संतान’ जैसी अवधारणा को खत्म करने का प्रस्ताव है. शादी, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी या ART से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार देने की बात कही गई है.

संपत्ति में बेटा-बेटी को बराबर अधिकार

प्रस्तावित कानून में बेटे और बेटी दोनों को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रावधान है. इसमें माता और पिता को भी पहली श्रेणी का उत्तराधिकारी माना गया है.

गंभीर अपराध में छिन सकता है उत्तराधिकार अधिकार

बिल के अनुसार, हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति को संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिलेगा. अगर कोई कानूनी वारिस नहीं होगा तो संपत्ति राज्य के पास जा सकती है.

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी

UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के अंदर रजिस्ट्रार के पास इसकी जानकारी देनी होगी. लिव-इन में रहने वाले दोनों लोगों की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और वे पहले से शादीशुदा नहीं होने चाहिए. नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने और सजा का प्रावधान भी रखा गया है.

शादीशुदा व्यक्ति के लिव-इन पर सख्ती

अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो उसके लिए सजा का प्रावधान रखा गया है. वहीं, अगर पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है तो महिला भरण-पोषण की मांग कर सकती है.

ये भी पढ़ें- राम और रहीम के लिए एक कानून... MP कैबिनेट ने UCC को दी मंजूरी, अब विधानसभा में पेश होगा बिल