उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार शाम उस वक्त सनसनी फैल गई, जब दुबग्गा इलाके में शारदा सहायक नहर से भाजपा नेता धीरेंद्र प्रताप सिंह का शव बरामद हुआ. 35 वर्षीय धीरेंद्र प्रताप सिंह महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष भी थे. पुलिस के मुताबिक, उनके सिर के पिछले हिस्से और दाहिने सीने में गोली मारी गई थी. शव मिलने के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और मामले की जांच शुरू कर दी.
अपहरण की शिकायत के बाद शुरू हुई तलाश
धीरेंद्र प्रताप सिंह मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले थे और लखनऊ की वृंदावन कॉलोनी में रहते थे. उनकी पत्नी ममता सिंह ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके पति का ड्राइवर और कुछ अन्य लोगों ने अपहरण कर लिया है. शिकायत मिलते ही पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और मामले के खुलासे के लिए छह टीमों का गठन किया. सर्विलांस और CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की.
ड्राइवर समेत दो संदिग्ध हिरासत में
जांच के दौरान पुलिस को धीरेंद्र प्रताप सिंह के ड्राइवर रवि तिवारी और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका पर संदेह हुआ. दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. पुलिस के अनुसार, पूछताछ में ड्राइवर ने हत्या की बात कबूल की है. शुरुआती जांच में हत्या की वजह उन्नाव की एक जमीन को लेकर चल रहा विवाद सामने आया है. हालांकि पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
पहले बेहोश किया, फिर मारी गोली
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, धीरेंद्र प्रताप सिंह को पहले रुमाल सुंघाकर कथित तौर पर बेहोश किया गया. इसके बाद उनके दाहिने सीने में गोली मारी गई और फिर सिर के पिछले हिस्से में गोली मारकर हत्या कर दी गई. पुलिस को वह कार भी बरामद हो गई है, जिसमें हत्या किए जाने की आशंका है. अब इस वाहन और अन्य साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है.
फॉर्च्यूनर से ले गए शव, नहर में फेंका
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव को फॉर्च्यूनर कार से दुबग्गा इलाके में किसान पथ के पास एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया. इसके बाद सड़क से करीब 50 मीटर दूर स्थित शारदा सहायक नहर में शव फेंक दिया गया. शव मिलने के बाद फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच की और मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए. हत्या में इस्तेमाल हथियार समेत अन्य सामान की भी तलाश की जा रही है.
प्रॉपर्टी विवाद समेत कई एंगल पर जांच जारी
डीसीपी साउथ मो. मुस्ताक अली के अनुसार, पुलिस ने मामले के खुलासे के लिए छह टीमें लगाई थीं और सर्विलांस व CCTV की मदद से संदिग्धों तक पहुंच बनाई गई. फिलहाल ड्राइवर रवि तिवारी और एक अन्य संदिग्ध पुलिस हिरासत में हैं. शुरुआती जांच में जमीन विवाद हत्या की वजह माना जा रहा है, लेकिन पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. बरामद साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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