संत गुरु रविदास जी का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और न्याय का प्रतीक... जालंधर में बोले पीएम मोदी

PM Modi In Jalandhar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट का नाम महान संत श्री गुरु रविदास जी के नाम पर रखने की औपचारिक घोषणा की. इस मौके पर डेरा सच्चखंड बल्लां समेत विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में संगत और श्रद्धालु कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे.

life Saint Guru Ravidas ji is a symbol of social harmony equality and justice PM Modi in Jalandhar
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PM Modi In Jalandhar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट का नाम महान संत श्री गुरु रविदास जी के नाम पर रखने की औपचारिक घोषणा की. इस मौके पर डेरा सच्चखंड बल्लां समेत विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में संगत और श्रद्धालु कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. जैसे ही प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट के नए नाम का ऐलान किया, पूरे परिसर में “जय गुरु रविदास” और “रविदास शक्ति” के नारों से माहौल गूंज उठा. श्रद्धालुओं में इस फैसले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला.

आदमपुर से ही प्रधानमंत्री मोदी ने लुधियाना स्थित हलवारा एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन भी किया. इस कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. मौसम को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल पर वाटरप्रूफ टेंट में विशाल मंच तैयार किया गया था. सुबह से ही मेहमानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और पूरे इलाके में आयोजन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.

गुरु रविदास जयंती पर प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पंजाब की धरती को नमन करते हुए कहा कि आज संत श्री गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती का पावन अवसर है. उन्होंने गुरु रविदास जयंती और माघ पूर्णिमा की देशवासियों को शुभकामनाएं दीं. प्रधानमंत्री ने काशी से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए बताया कि संत रविदास जी की शिक्षाओं का प्रकाश काशी की धरती से समाज में फैला और उन्हें वहां सांसद के रूप में सेवा करने का अवसर मिला है.

काशी से जुड़ाव और पंजाब की संगत से भावनात्मक रिश्ता

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका रिश्ता गुरु रविदास जी की जन्मस्थली काशी से जुड़ा हुआ है और वहां से उन्हें हमेशा आशीर्वाद मिलता रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जाने के दौरान पंजाब से आए श्रद्धालुओं से उनकी मुलाकात होती रहती है. इस बार पंजाब आना उनके लिए सौभाग्य की बात है और वह इसे गुरु रविदास जी की प्रेरणा से जुड़ा हुआ मानते हैं.

केंद्रीय बजट पर बोले प्रधानमंत्री

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट का जिक्र करते हुए कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने कई आवश्यक दवाओं की कीमतें कम की हैं और गरीबों व बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज जैसी सुविधाएं बढ़ाई हैं. नए बजट में भी इसी सोच को आगे बढ़ाया गया है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं को और सस्ता किया गया है, ताकि आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम हो सके.

संत रविदास जी के विचारों को बताया प्रासंगिक

प्रधानमंत्री ने कहा कि संत गुरु रविदास जी का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और न्याय का प्रतीक है. उन्होंने भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाकर समाज को एक नई दिशा दी. आदमपुर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखना उनके विचारों के प्रति सम्मान और आने वाली पीढ़ियों को उनके संदेश से जोड़ने का प्रयास है. प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को एकजुट रखने में मार्गदर्शन करती हैं.

डेरा सच्चखंड बल्लां में श्रद्धा और सामाजिक चेतना का संगम

इस मौके पर डेरा सच्चखंड बल्लां परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था. गुरु रविदास जी की शिक्षाओं से जुड़े बैनर और पोस्टर लगाए गए थे. संगत ने झंडों और तस्वीरों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया. सुबह से ही दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालु प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर उत्साहित नजर आए. पूरे कार्यक्रम में आध्यात्मिक माहौल और सामाजिक सम्मान का भाव साफ झलक रहा था.

राजनीतिक नजरिए से भी अहम फैसला

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आदमपुर एयरपोर्ट का नाम संत रविदास जी के नाम पर करना पंजाब की सामाजिक और दलित चेतना के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम है. इसे सामाजिक संतुलन और सम्मान की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. डेरा सच्चखंड बल्लां जैसे प्रभावशाली धार्मिक केंद्र पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी को संगत ने सामाजिक मान्यता के रूप में देखा.

विकास और सामाजिक समरसता का संदेश

कुल मिलाकर आदमपुर और हलवारा एयरपोर्ट से जुड़े ये फैसले पंजाब के बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश देते हैं. प्रधानमंत्री के इस दौरे को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक सम्मान और विकास के साझा प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

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