Budget 2026: टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत, अब 31 मार्च तक सुधार सकेंगे ITR की गलतियां; जानिए क्या हैं नए नियम

Union Budget 2026 ITR Rules: यूनियन बजट 2026 पेश होने के बाद से ही नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्ग के बीच टैक्स से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ करदाताओं के लिए भी कुछ अहम फैसले किए गए हैं.

Budget 2026 Big relief to taxpayers ITR mistakes can be corrected till March 31 new rules
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Union Budget 2026 ITR Rules: यूनियन बजट 2026 पेश होने के बाद से ही नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्ग के बीच टैक्स से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ करदाताओं के लिए भी कुछ अहम फैसले किए गए हैं. इन्हीं में से एक फैसला सीधे तौर पर आम टैक्सपेयर्स की रोजमर्रा की चिंता से जुड़ा है, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में होने वाली गलतियों को सुधारने की समयसीमा बढ़ाना.

अक्सर देखा जाता है कि रिटर्न फाइल करते समय जल्दबाजी, दस्तावेज देर से मिलने या पूरी जानकारी न होने के कारण किसी न किसी तरह की गलती हो जाती है. कई बार आय का कोई स्रोत छूट जाता है या फिर सही डिडक्शन क्लेम नहीं हो पाता. ऐसे में टैक्स नोटिस का डर बना रहता है. सरकार ने इस व्यावहारिक समस्या को समझते हुए करदाताओं को बड़ी राहत दी है.

अब 31 मार्च तक मिलेगा मौका

नए आयकर प्रावधानों के तहत अब टैक्सपेयर्स को लेट या रिवाइज्ड ITR दाखिल करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है जिन्हें फॉर्म-16, बैंक से ब्याज सर्टिफिकेट या अन्य जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं मिल पाते. कई बार लोग अनुमान के आधार पर रिटर्न भर देते हैं और बाद में पता चलता है कि आंकड़ों में गलती रह गई है.

अब यदि आपने पहले ही रिटर्न फाइल कर दिया है और बाद में यह महसूस होता है कि कोई इनकम जोड़ना रह गई है या कोई टैक्स छूट का लाभ लेना भूल गए हैं, तो आप संशोधित रिटर्न दाखिल करके 31 मार्च तक अपनी गलती सुधार सकते हैं. इससे टैक्स नोटिस या भविष्य में कानूनी झंझटों की संभावना कम हो जाएगी.

राहत के साथ अनुशासन भी जरूरी

सरकार ने जहां एक ओर समय सीमा बढ़ाकर करदाताओं को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ कर दिया है कि यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त नहीं है. तय समय के बाद ITR फाइल करने या संशोधन करने पर लेट फाइलिंग फीस देनी होगी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोग समय पर टैक्स अनुपालन करें और व्यवस्था में ढीलापन न आए.

जुर्माने की राशि करदाता की सालाना आय के आधार पर तय होती है. जिनकी आय सीमित है, उनके लिए पेनल्टी अपेक्षाकृत कम रखी गई है. वहीं अधिक आय वालों को ज्यादा फीस चुकानी पड़ सकती है. इसके अलावा, यदि रिटर्न में सुधार के बाद यह सामने आता है कि टैक्स की कुछ रकम पहले कम जमा की गई थी, तो उस बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना पड़ सकता है.

किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ वेतनभोगी कर्मचारियों और मध्यम वर्ग को होगा. आज के दौर में लोगों की आय के कई स्रोत हो सकते हैं, जैसे सैलरी के अलावा बैंक एफडी से ब्याज, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से रिटर्न, किराये की आमदनी या फिर पार्ट-टाइम फ्रीलांस काम. रिटर्न भरते समय अक्सर ये छोटी-छोटी जानकारियां छूट जाती हैं, जो बाद में परेशानी का कारण बनती हैं.

पहली बार टैक्स फाइल करने वाले युवाओं के लिए भी यह प्रावधान काफी उपयोगी साबित होगा. अनुभव की कमी के कारण कई लोग गलत फॉर्म चुन लेते हैं या आंकड़े ठीक से नहीं भर पाते. बाद में नोटिस आने पर उन्हें चिंता होती है. अब उनके पास समय रहते अपनी गलती सुधारने का विकल्प मौजूद रहेगा.

टैक्सपेयर्स के लिए एक सुरक्षित रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव करदाताओं और टैक्स विभाग, दोनों के लिए फायदेमंद है. करदाता अपनी गलती खुद सुधार सकते हैं और विभाग को बार-बार नोटिस भेजने की जरूरत कम पड़ेगी. इससे टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा.

कुल मिलाकर, बजट 2026 में किया गया यह प्रावधान टैक्सपेयर्स को मानसिक राहत देने वाला कदम है. हालांकि, करदाताओं को यह समझना होगा कि समयसीमा बढ़ना लापरवाही का लाइसेंस नहीं है. बेहतर यही है कि सभी जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करके समय पर और सही जानकारी के साथ ITR फाइल किया जाए. फिर भी अगर कोई गलती रह जाए, तो 31 मार्च तक सुधार का मौका अब आपके पास मौजूद है.

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