पाकिस्तान से बांग्लादेश पहुंचे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी! भारत के खिलाफ खतरनाक प्लान बना रहे यूनुस?

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ती दिख रही है.

Lashkar-e-Taiba terrorists reached Bangladesh from Pakistan
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बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ती दिख रही है. अमेरिका ने संभावित हिंसा को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है और ढाका स्थित अपने दूतावास को चुनावी अवधि के दौरान सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. इस बीच सामने आई एक रिपोर्ट ने हालात को और गंभीर बना दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े संदिग्ध आतंकी बांग्लादेश पहुंचे हैं.

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच करीब 14 साल बाद सीधी हवाई सेवाएं दोबारा शुरू की गई हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की सूचनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी हो सकती हैं.

कराची से ढाका पहुंचने वाली फ्लाइट पर संदिग्ध यात्रियों का दावा

इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट हसन खोकोन ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG-342, जो कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़कर ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरी, उसमें कुछ ऐसे यात्री थे जिनके लश्कर-ए-तैयबा से संबंध होने की आशंका जताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक यह फ्लाइट 30 जनवरी की सुबह ढाका पहुंची थी और इसमें कुल 113 यात्री सवार थे.

खोकोन का कहना है कि उपलब्ध यात्रा दस्तावेजों और पहचान से कुछ यात्रियों को संदिग्ध आतंकी नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है. उन्होंने इस मामले को बांग्लादेश की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक बताया है और दावा किया है कि यह या तो लापरवाही का नतीजा है या फिर जानबूझकर अनदेखी किए जाने का संकेत देता है.

सीधी उड़ानों के बाद उठे सुरक्षा पर सवाल

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ढाका और कराची के बीच सीधी फ्लाइट सेवा दोबारा शुरू करने के फैसले के बाद से ही सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे. करीब 14 साल के अंतराल के बाद यह रूट फिर से खोला गया है. आलोचकों का कहना है कि इसके साथ कुछ विवादित रियायतें भी दी गई हैं, जिनमें वीजा प्रक्रिया में ढील, अधिकारियों और कुछ खास श्रेणियों के यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं और कार्गो जांच में नरमी जैसी बातें शामिल हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुरक्षा जांच में सख्ती नहीं बरती गई तो नागरिक उड्डयन मार्गों का दुरुपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. मौजूदा आरोपों ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है कि आतंकी संगठन आम नागरिक विमानों को कवर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.

चुनावी माहौल में बढ़ती कट्टरपंथी गतिविधियों की चिंता

चुनाव से पहले अमेरिका की ओर से संभावित हिंसा की चेतावनी और अब आतंकी घुसपैठ से जुड़ी रिपोर्टों ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में कट्टरपंथी संगठन अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि देश के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को कमजोर किया जा सके.

लश्कर-ए-तैयबा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है और उस पर कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में इस संगठन से जुड़े किसी भी नेटवर्क की संभावित मौजूदगी को गंभीर खतरे के तौर पर देखा जा रहा है.

पहले भी सामने आ चुके हैं संपर्क और गतिविधियों के संकेत

रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले भी कुछ ऐसे मामलों की चर्चा सामने आई थी, जिनमें पाकिस्तान आधारित कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों के बांग्लादेश आने-जाने की खबरें आई थीं. अक्टूबर 2025 में लश्कर से जुड़े माने जाने वाले कुछ प्रभावशाली धार्मिक नेताओं की बांग्लादेश यात्रा की चर्चाएं भी हुई थीं. बताया गया कि इन दौरों के दौरान सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील जिलों में गतिविधियां देखी गई थीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी थी.

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक मंचों और सामाजिक संगठनों का इस्तेमाल कई बार चरमपंथी नेटवर्क विस्तार के लिए किया जाता है. ऐसे में चुनावी माहौल में इन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना जरूरी हो जाता है.

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