तेहरान: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश की मिसाइल क्षमता को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने मिसाइलों की अधिकतम दूरी पर लगी सारी पाबंदियां हटा दी हैं. इसका मतलब है कि अब ईरान लंबे रेंज की मिसाइलें बना सकता है, जो अमेरिका तक भी पहुंचने में सक्षम हो सकती हैं. यह फैसला ईरान की रक्षा नीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
मिसाइल रेंज की पाबंदियों को हटाने का फैसला
ईरानी सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अहमद बाक्शयेश अरदस्तानी ने बताया कि पहले मिसाइल रेंज की अधिकतम सीमा 2,200 किलोमीटर थी, जिसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है. उनका कहना है कि ईरान अपनी मिसाइल योजना को अपनी जरूरत के अनुसार विकसित करेगा और किसी भी सीमा को स्वीकार नहीं करेगा.
अमेरिका और इजराइल के साथ जारी तनातनी
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इजराइल और अमेरिका ने जून महीने में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान 8,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है, जो अमेरिका के बड़े शहरों को निशाना बना सकती हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने इस आरोप को नकारते हुए कहा कि इजराइल अमेरिका को गुमराह कर रहा है.
मिसाइल क्षमता और तकनीक का विस्तार
ईरान ने इस्लामिक क्रांति के बाद से ही मिसाइल तकनीक में तेजी से सुधार किया है. उत्तर कोरिया और चीन की मदद से विकसित की गई मिसाइलें अब कई देशों को भी निर्यात की जाती हैं, जिनमें रूस भी शामिल है. रूस ईरान को हथियार देता है और बदले में ईरान उसे मिसाइलें सप्लाई करता है. ईरान की प्रमुख मिसाइलों में सेजिल, खेबर, शहाब-3 और इमाद-1 शामिल हैं. ये मिसाइलें हजारों किलोमीटर तक मार कर सकती हैं और कई मिसाइलों को अपग्रेड करके उनकी मारक क्षमता और रेंज बढ़ाई जा चुकी है.
शहाब मिसाइलें: ईरान की मिसाइल शक्ति की रीढ़
शहाब-3 और शहाब-4 मिसाइलें ईरान की आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम की प्रमुख मिसाइलें हैं. शहाब-3 मिसाइल विशेष रूप से मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों का आधार मानी जाती है. पिछले कुछ वर्षों में इन मिसाइलों की चर्चा और तकनीकी उन्नयन पर भी जोर दिया गया है.
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