America Iran Conflict: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को और सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. अरब सागर और लाल सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट के साथ कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए गए हैं. इन युद्धपोतों के साथ 70 से अधिक लड़ाकू विमानों की तैनाती भी की गई है. इस कदम का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना और ईरान पर संभावित हमलों की तैयारी करना है.
साथ ही अमेरिका ने कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से अपनी वायुसेना की सक्रियता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांड सेंटरों पर समुद्र और आकाश दोनों से हमले की स्थिति में है.
ईरान ने भी दिया कड़ा इशारा
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह पिछले साल जून 2025 की तरह कतर के अमेरिकी ठिकानों और इज़राइल पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंकारा के दौरे की योजना बनाई है, ताकि अमेरिका के हमले को टाला जा सके और बातचीत के द्वार खुले रहें. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच वीडियो वार्ता का प्रस्ताव रखा है, जिस पर अराघची चर्चा करेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को किसी अतिरिक्त जमावड़े की जरूरत नहीं पड़ेगी. यदि राजनीतिक आदेश मिलता है, तो कुछ ही घंटों में सीमित या बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई की संभावना है. इसे हमले से पहले की स्थिति के रूप में देखा जा रहा है.
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड पर यूरोपीय संघ का प्रतिबंध
यूरोपीय संघ (EU) ने हाल ही में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है. यह निर्णय ईरानी सरकार की विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के मद्देनजर लिया गया. रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडरों समेत 15 अधिकारियों और छह संगठनों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं. इनमें ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करने वाली संस्थाएं भी शामिल हैं. यूरोप में उनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी और इन अधिकारियों की यात्रा पर रोक भी लगेगी.
ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल क्षमताएं
ईरानी सेना की ताकत उल्लेखनीय है. कुल सैनिकों की संख्या 11.8 लाख है, बैटल टैंक 1,700, बख्तरबंद वाहन 65,000 और तोपखाने 6,800 हैं. इसके अलावा, ईरान के पास 300 फाइटर जेट हैं. मिसाइल और ड्रोन तकनीक में भी ईरान ने तेजी से प्रगति की है. ईरानी ‘शाहिद-136’ सुसाइड ड्रोन लंबी दूरी तक उड़ान भरकर लक्ष्य से टकराकर विस्फोट कर सकता है, जबकि ‘शाहिद-129’ सशस्त्र ड्रोन निगरानी और मिसाइल हमले दोनों में सक्षम है.
‘मोहाजेर-6’ टोही और स्ट्राइक ड्रोन है, जो गाइडेड बम और मिसाइल ले जाने में सक्षम है. जून 2025 में ईरान ने इज़राइल पर 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे थे, जिनमें इन ड्रोन का भी पहला बार इस्तेमाल हुआ था. ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइल ‘फतह’ की रेंज लगभग 1,400 किलोमीटर है और यह विशेष रूप से इज़राइल के लिए खतरनाक मानी जाती है.
खाड़ी देशों में अमेरिकी मोर्चाबंदी
फारस खाड़ी में अमेरिका की ताकत भी बढ़ा दी गई है. कतर, बहरीन, UAE और सऊदी अरब में कुल 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट के साथ 70 लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है. इसके अलावा, 5 फ्रिगेट और 300 से अधिक टॉमहॉक मिसाइल युद्धपोतों पर मौजूद हैं.
परमाणु ठिकानों और मिसाइल बेस पर निगरानी
ईरान के परमाणु ठिकानों जैसे इस्फहान, नांतेज और फोर्दो पर विशेष नजर रखी जा रही है. अमेरिका इन ठिकानों पर संभावित हमले की तैयारी के तहत समुद्र और आकाश दोनों से सक्रिय निगरानी कर रहा है. साथ ही, ईरान की नई मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय की स्थिति युद्ध की आहट जैसी है, लेकिन साथ ही राजनीतिक समाधान की कोशिशें भी जारी हैं. तुर्की और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता इस तनावपूर्ण माहौल को कुछ हद तक शिथिल कर सकती है.
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