झारखंड में 22 परीक्षाएं रद्द, नौकरीपेशा अफसरों पर गिरी गाज, जानें कितने लोग हुए बेरोजगार

Jharkhand Exams Cancelled: परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोपों के बीच सरकार के फैसले से JPSC-JSSC के जरिए चयनित 2,394 अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी पर संकट गहरा गया है, जानें किस विभाग में कितने पद प्रभावित हुए.

jharkhand-cancels-22-exams-2394-jobs-cid-probe
Image Source: Internet

Jharkhand Exams Cancelled: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदलता दिखाई दे रहा है. परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, अनियमितता और प्रश्नपत्र लीक जैसे आरोपों के बीच राज्य सरकार ने JPSC और JSSC से जुड़ी 22 प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है. इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID को सौंपने का निर्णय लिया गया है. सरकार के इस कदम ने उन हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी सेवाएं ज्वाइन कर ली थीं.

एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों को सरकार के फैसले से राहत मिली है, तो दूसरी तरफ पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने नौकरी और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है. बताया जा रहा है कि रद्द की गई परीक्षाओं से जुड़े 2,394 अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. इनमें बड़ी संख्या JSSC-CGL और JPSC के जरिए नियुक्त युवाओं की है. अब यह पूरा मामला न्यायिक लड़ाई तक पहुंच चुका है.

26 दिन के आंदोलन के बाद छात्रों ने स्थगित किया धरना

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र पिछले 26 दिनों से आंदोलन कर रहे थे. सरकार की ओर से 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 23 पुरानी परीक्षाओं की CID जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का भरोसा मिलने के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अपना धरना दो महीने के लिए स्थगित कर दिया.

सरकार ने IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति गठित की है. समिति का उद्देश्य भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाना और परीक्षा प्रक्रिया में ऐसी खामियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था तैयार करना है.

हालांकि छात्रों का आंदोलन थमने के साथ ही विवाद खत्म नहीं हुआ. परीक्षा पास करके नौकरी हासिल कर चुके युवाओं ने सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

नौकरी कर रहे 2,394 अभ्यर्थियों पर क्यों आया संकट?

सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जिन्होंने संबंधित परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के बाद नियुक्ति पाई और कई महीनों से सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे. इनमें JSSC-CGL के जरिए नियुक्त 1,932 कर्मचारी भी शामिल हैं.

इन नियुक्तियों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, प्रखंड कल्याण अधिकारी, प्रखंड आपूर्ति अधिकारी और अंचल निरीक्षक जैसे पद शामिल हैं. इन कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा राज्य सचिवालय और जिलों में प्रशासनिक कामकाज से जुड़ा हुआ था.

इसके अलावा 11वीं-13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए नियुक्त 342 अधिकारियों पर भी फैसले का असर पड़ा है. इनमें बड़ी संख्या उप समाहर्ताओं यानी डिप्टी कलेक्टर की बताई जा रही है. बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी समेत अन्य पदों पर हुई नियुक्तियां भी इस विवाद की चपेट में आई हैं.

JSSC-CGL के 1,932 पदों पर सबसे बड़ा असर

रद्द की गई परीक्षाओं में JSSC-CGL परीक्षा का मामला सबसे महत्वपूर्ण है. इस परीक्षा के जरिए कुल 1,932 पदों पर नियुक्तियां की गई थीं. इनमें 847 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, 293 कनीय सचिवालय सहायक, 170 श्रम प्रवर्तन अधिकारी, 191 प्रखंड कल्याण अधिकारी, 249 प्रखंड आपूर्ति अधिकारी और 178 अंचल निरीक्षक-कानूनगो के पद शामिल हैं.

इन पदों पर नियुक्त कई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां संभाल रहे थे. ऐसे में परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी सेवाओं को लेकर स्थिति असमंजसपूर्ण हो गई है. प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई भी है तो जांच के आधार पर दोषी लोगों की पहचान होनी चाहिए. उनका तर्क है कि सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है.

JPSC की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी रद्द

सरकार के आदेश के दायरे में JPSC की कई अहम परीक्षाएं भी शामिल हैं. इनमें संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, सिविल जज भर्ती, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी जैसी परीक्षाएं शामिल हैं.

इसके अलावा विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर और मेडिकल कॉलेजों से संबंधित कुछ भर्तियां भी रद्द की गई परीक्षाओं में शामिल हैं. झारखंड पात्रता परीक्षा और संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा भी इस फैसले के दायरे में आई हैं.

इस निर्णय के बाद उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने इन परीक्षाओं के लिए वर्षों तक तैयारी की और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी सेवा में प्रवेश किया था.

23 पुरानी परीक्षाओं की अब होगी CID जांच

सरकार ने केवल 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला नहीं लिया है. वर्ष 2010 से 2022 के बीच आयोजित 23 पुरानी और संवेदनशील परीक्षाओं की जांच भी CID को सौंपने का निर्णय लिया गया है. इन परीक्षाओं से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी भी अब जांच के दायरे में आ सकते हैं.

जांच के दायरे में पांचवीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, सिविल जज भर्ती परीक्षाएं, मृदा संरक्षण पदाधिकारी भर्ती, कृषि विभाग से जुड़ी नियुक्तियां, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी भर्ती, दंत चिकित्सक भर्ती, छठी JPSC, सहायक लोक अभियोजक, संयुक्त सहायक अभियंता और सातवीं से दसवीं JPSC जैसी परीक्षाएं शामिल हैं.

इन पुरानी भर्तियों से वर्तमान में करीब 2,044 अधिकारी और कर्मचारी राज्य के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे बताए जा रहे हैं. ऐसे में CID जांच के नतीजे आने के बाद इन नियुक्तियों को लेकर भी आगे की तस्वीर साफ होगी.

सचिवालय में कामकाज पर भी पड़ सकता है असर

एक साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाएं प्रभावित होने से राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है. सचिवालय में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विभागों में फाइलों के संचालन से जुड़े कई काम संभालते हैं.

यदि बड़ी संख्या में इन कर्मचारियों की सेवाएं रुकती हैं तो विभागों में फाइलों की आवाजाही और रोजमर्रा के प्रशासनिक काम प्रभावित हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में दूसरे अधिकारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालनी पड़ सकती है.

राज्य प्रशासनिक सेवा के स्तर पर भी इसका असर महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. 11वीं-13वीं JPSC के जरिए चयनित नए उप समाहर्ताओं को प्रशिक्षण के बाद विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी गई थी. उनकी नियुक्ति प्रभावित होने से प्रशासनिक पदों पर रिक्तियों का दबाव बढ़ सकता है.

DSP और बाल विकास सेवाओं पर भी असर की आशंका

इस फैसले का असर केवल सचिवालय के कामकाज तक सीमित नहीं रहने की आशंका है. राज्य पुलिस सेवा में DSP स्तर के पदों पर पहले से रिक्तियों के बीच नए नियुक्त अधिकारियों की सेवाएं प्रभावित होने पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

इसी तरह बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रभावित होने से आंगनबाड़ी और बाल विकास योजनाओं के संचालन पर असर पड़ने की चिंता है. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की सेवाओं को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. इन अधिकारियों की भूमिका खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई में महत्वपूर्ण होती है.

प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

सरकार के फैसले के बाद नौकरी कर रहे प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है. उनका कहना है कि बिना व्यक्तिगत भूमिका या दोष साबित किए पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है.

याचिकाकर्ताओं की दलील है कि यदि किसी परीक्षा में अनियमितता हुई है तो जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसमें कौन लोग शामिल थे. केवल परीक्षा रद्द करके उन सभी अभ्यर्थियों की नियुक्तियां खत्म करना उचित नहीं होगा, जिन्होंने चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल की और अब तक अपनी सेवाएं ईमानदारी से दी हैं.

अब इस मामले में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी. हाईकोर्ट का रुख यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि सरकार के फैसले के बाद नियुक्त कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाओं को लेकर आगे क्या व्यवस्था बनेगी.

अमिताभ कौशल कमेटी से परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

सरकार ने भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद रोकने के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति गठित की है. समिति में प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों को भी शामिल किया गया है.

इस समिति को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, तकनीकी और प्रशासनिक खामियों को दूर करने तथा प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम करने के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है. समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है.

छात्रों को राहत, चयनित अभ्यर्थियों की लड़ाई जारी

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब दो अलग-अलग पक्षों में बंट गया है. आंदोलन कर रहे छात्रों को 22 परीक्षाएं रद्द होने और 23 परीक्षाओं की जांच के फैसले से फिलहाल राहत मिली है. दूसरी ओर पहले से नौकरी कर रहे 2,394 चयनित अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला उनके करियर और भविष्य का बड़ा संकट बन गया है.

अब पूरे मामले की दिशा हाईकोर्ट की सुनवाई, CID जांच और परीक्षा सुधार समिति की रिपोर्ट से तय होगी. सरकार का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करना है, लेकिन इस प्रक्रिया में उन युवाओं के हितों की रक्षा कैसे होगी, जिन्होंने चयन के बाद सरकारी सेवा ज्वाइन कर ली थी, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है.

ये भी पढ़ें- Jharkhand: सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, JSSC-CGL समेत TDPL की परीक्षाएं की कैंसिल, छात्रों ने खत्म किया अनशन