ड्रोन, मिसाइल से लेकर न्यूक्लियर बम तक... किस युद्ध की तैयारी में जुटा जापान? बना रहा कई घातक हथियार

जापान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में तेजी से जुटा है. चीन, उत्तर कोरिया और रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच जापान अब ऐसे हथियार विकसित करने पर ध्यान दे रहा है, जो उसकी रक्षा क्षमता को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर सकते हैं.

Japan Boosting Military Strength From drones and missiles to nuclear weapons
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Japan Military Strength: जापान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में तेजी से जुटा है. चीन, उत्तर कोरिया और रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच जापान अब ऐसे हथियार विकसित करने पर ध्यान दे रहा है, जो उसकी रक्षा क्षमता को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर सकते हैं. इन देशों के पास परमाणु हथियार हैं और जापान के साथ इनके कई सुरक्षा और क्षेत्रीय विवाद भी हैं. ऐसे माहौल में जापान अपनी पुरानी सुरक्षा नीति में बदलाव करते हुए लंबी दूरी के आधुनिक हथियारों पर जोर दे रहा है. चीन पहले ही यह चिंता जता चुका है कि जापान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता मौजूद है.

एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जापान के रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2027 के बजट प्रस्ताव में पानी के अंदर से दागी जा सकने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास को शामिल किया है. इसका मकसद दुश्मन के ठिकानों पर दूर से जवाबी हमला करने की क्षमता को मजबूत करना है. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी तस्वीर में एक पनडुब्बी दिखाई गई है, जिसमें दो या तीन वर्टिकल लॉन्च सिस्टम लगाए जा सकते हैं. इनमें कई हाइपरसोनिक मिसाइलें रखी जा सकती हैं.

जापान की हाइपरसोनिक मिसाइल कितनी ताकतवर?

जापान पहले से ही हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल यानी एचवीजीपी पर काम कर रहा है. इस तरह के हथियार को पहले एक बड़े रॉकेट की मदद से ऊंचाई तक पहुंचाया जाता है. इसके बाद ग्लाइडर बहुत तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ता है. इसकी गति मैक 5 या उससे ज्यादा हो सकती है.

जापान इसके नए संस्करणों पर भी काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, एन्हांस्ड कैपेबिलिटी वर्जन ब्लॉक 2ए की मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर बताई गई है, जबकि ब्लॉक 2बी को करीब 3,000 किलोमीटर तक की दूरी के लिए तैयार करने की योजना है.

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल भी तैयार कर रहा जापान

जापान पानी के अंदर से लॉन्च की जा सकने वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक पर भी काम कर रहा है. इसमें स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा. इस मिसाइल को पहले बूस्टर की मदद से जरूरी रफ्तार दी जाएगी और उसके बाद इंजन उड़ान के दौरान इसे आगे बढ़ाने में मदद करेगा.

इस तकनीक से मिसाइल को अपेक्षाकृत छोटा बनाया जा सकता है. हालांकि, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तकनीक काफी जटिल है और अभी इसके विकास का काम शुरुआती दौर में है.

पानी के अंदर चलने वाले ड्रोन पर भी नजर

जापान अपनी पनडुब्बियों की क्षमता बढ़ाने के लिए अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल्स यानी बिना चालक वाले पानी के अंदर चलने वाले वाहनों पर भी काम कर रहा है. इन सिस्टम को लंबी दूरी तक हमला करने वाले हथियारों से लैस करने की क्षमता पर रिसर्च की जा रही है.

ऐसे सिस्टम पानी के अंदर छिपकर लंबे समय तक काम कर सकते हैं और इन्हें पकड़ना आसान नहीं होगा. जापान का मानना है कि इनका इस्तेमाल भविष्य में समुद्री इलाकों में दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य सैन्य जहाजों पर नजर रखने या उन्हें रोकने की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है.

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