पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है. ताइवान को लेकर जापान और चीन के बीच बढ़ती तल्खी के बीच अमेरिका ने खुलकर जापान का पक्ष लिया है. क्षेत्र में शक्ति संतुलन लगातार बदल रहा है, और ऐसे माहौल में वाशिंगटन का यह बयान स्थिति को और निर्णायक बना देता है.
तनाव की वजह जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची का वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा था कि ताइवान पर चीन का सैन्य हमला जापान की “अस्तित्व के लिए खतरा” वाली स्थिति बन सकता है. ऐसी स्थिति में जापान सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है.चीन ने इस टिप्पणी को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और ताकाइची से बयान वापस लेने की मांग की.
अमेरिका ने दिया जापान को मजबूत कूटनीतिक समर्थन
चीन के विरोध के बीच अमेरिका ने साफ कर दिया कि जापान के साथ उसकी साझेदारी अडिग है. जापान में अमेरिकी राजदूत जॉर्ज ग्लास ने विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी से मुलाकात के बाद कहा कि चीन की प्रतिक्रिया “उकसाने वाली” है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता कमजोर होती है.ग्लास ने यह भी जोर दिया कि अमेरिका जापान की रक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निभाएगा. इसमें पूर्वी चीन सागर के विवादित सेनकाकू द्वीप भी शामिल हैं, जिन पर चीन दावा करता है. अमेरिकी राजदूत ने चीन द्वारा जापानी समुद्री खाद्य पदार्थों पर पुनः लगाए गए प्रतिबंध को “आर्थिक दबाव की典क मिसाल” बताया.
ताकाइची का कड़ा रुख, लेकिन रिश्तों में सुधार की इच्छा
चीन की तीखी प्रतिक्रिया के बावजूद ताकाइची अपने बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि ताइवान को लेकर जापान की नीति हमेशा से स्पष्ट और समान रही है.G20 शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले ताकाइची ने साफ कहा कि उनका बयान सरकार की आधिकारिक नीति पर आधारित है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जापान बीजिंग के साथ बेहतर संबंध चाहता है.
चीन के प्रतिउत्तर में कई सख्त कदम
हाल के दिनों में चीन ने जवाबी कार्रवाई के रूप में कई निर्णायक कदम उठाए हैं. जापानी समुद्री खाद्य पदार्थों के आयात पर दोबारा प्रतिबंध लगाया गया. चीनी नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई कि वे फिलहाल जापान की यात्रा न करें.इसके बाद चीन में जापान यात्रा की लाखों बुकिंग रद्द होने लगीं.चीन जापान को पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत देश मानते हुए यह कदम जापान की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है.
अमेरिका को मिसाइल निर्यात पर भी चीन की आपत्ति
तनाव यहीं खत्म नहीं हुआ. शुक्रवार को चीन ने जापान द्वारा अमेरिका को पैट्रियट एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें निर्यात करने का विरोध किया. जापान ने हाल ही में अपने हथियार निर्यात नियमों को थोड़ा उदार बनाया है, और यह पहली बार है जब उसने इतनी उन्नत तकनीक वाली मिसाइलें निर्यात की हैं.
पूर्वी एशिया में बढ़ रहा है टकराव का ख़तरा
ताइवान को लेकर चीन की आक्रामकता और जापान–अमेरिका की बढ़ती साझेदारी ने क्षेत्र में एक नए भू-राजनीतिक समीकरण को जन्म दे दिया है. आने वाले महीनों में यह मुद्दा G20 जैसे मंचों पर और ज्यादा उभर सकता है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा असर पड़ सकता है.
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