IWT: सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पिछले साल इस समझौते को स्थगित कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान की ओर से लगातार बयानबाजी की जा रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और कई अन्य नेताओं ने भारत के इस कदम को लेकर नाराजगी जताई है.
पाकिस्तानी सेना भी कई बार इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखा चुकी है. हाल ही में सेना की बैठक के बाद जारी बयान में संकेत दिया गया कि पाकिस्तान इस मामले को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है.
पाकिस्तान लंबे समय से उठाता रहा है सवाल
भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि के बावजूद पाकिस्तान ने कई बार भारतीय जल परियोजनाओं का विरोध किया है. खासतौर पर पश्चिमी नदियों पर बनने वाली परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान लगातार आपत्तियां दर्ज कराता रहा है.
भारत के अनुसार, संधि में विवाद सुलझाने के लिए बनाए गए नियमों का इस्तेमाल कई बार परियोजनाओं में देरी कराने के लिए किया गया. भारत का तर्क है कि जिन मुद्दों को बातचीत से हल किया जा सकता था, उन्हें बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाया गया.
वहीं पाकिस्तान खुद को निचले बहाव वाला देश बताकर दुनिया के सामने पानी की समस्या को बड़ा मुद्दा बनाता रहा है. लेकिन भारत लगातार कहता रहा है कि आतंकवाद और पानी का रिश्ता अलग नहीं हो सकता. भारत का रुख साफ है कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते."
भारत की परेशानी क्या है?
भारत के सामने भी जल संकट एक बड़ी चुनौती है. कई इलाकों में भूजल का स्तर तेजी से गिर रहा है. ऐसे में नदियों के पानी का बेहतर इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है.
भारत का कहना है कि पिछले कुछ दशकों में मौसम और जल व्यवस्था में काफी बदलाव आया है. पूर्वी नदियों में पानी की उपलब्धता कम हुई है, जबकि पश्चिमी नदियों में पहले जैसी स्थिति बनी हुई है.
इसके अलावा 1960 के बाद बांध और जल प्रबंधन की तकनीक में काफी बदलाव आया है. आज जलाशयों की सुरक्षा, पानी का बेहतर भंडारण और तलछट हटाने के लिए नई तकनीकों की जरूरत होती है. भारत का मानना है कि पुरानी संधि में इन आधुनिक जरूरतों को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया था.
पाकिस्तान में पानी की समस्या कितनी बड़ी है?
पाकिस्तान लंबे समय से पानी की कमी का मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन उसके अपने आंकड़े बताते हैं कि समस्या सिर्फ भारत से आने वाले पानी की नहीं है.
पाकिस्तान में हर साल बड़ी मात्रा में पानी बिना इस्तेमाल किए समुद्र में चला जाता है. वहां की नहर व्यवस्था में भी काफी पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की बड़ी समस्या पानी का सही प्रबंधन नहीं होना है. पुराने सिंचाई सिस्टम, नहरों में रिसाव, पानी जमा करने की कम क्षमता और खेती के पुराने तरीके वहां की जल समस्या को बढ़ाते हैं.
यानी पाकिस्तान के लिए चुनौती सिर्फ भारत से मिलने वाले पानी की नहीं, बल्कि अपने जल संसाधनों को सही तरीके से इस्तेमाल करने की भी है.
सिंधु जल संधि को लेकर भारत की क्या योजना है?
भारत अब अपने हिस्से के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रहा है. इसके तहत कई जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है.
चिनाब नदी बेसिन में कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है. इनमें सवालकोट, पाकल दुल, रातले, किरू और क्वार जैसी जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं. इन परियोजनाओं से बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा रावी नदी की सहायक नदी पर बनने वाला उझ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट भी अहम माना जा रहा है. इससे पानी को जमा करने, सिंचाई बढ़ाने, बाढ़ नियंत्रण और बिजली उत्पादन में मदद मिलेगी.
जलाशयों को मजबूत करने पर भी भारत का फोकस
भारत पुराने जलाशयों और बांधों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. इसके लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जलाशयों में जमा गाद को हटाया जा सके और उनकी क्षमता बनी रहे.
भारत का कहना है कि कई जरूरी काम लंबे समय तक पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण प्रभावित हुए. अब भारत अपने हिस्से के पानी का पूरा इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
आगे क्या होगा?
सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद आने वाले समय में और बढ़ सकता है. पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत अपने जल अधिकारों के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है.
आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालेंगे या फिर पानी का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में नई चुनौती बनता रहेगा.
ये भी पढ़ें- 'बात सिर्फ PoK पर होगी...' राजनाथ सिंह की चेतावनी से बौखलाया पाकिस्तान, किया भारत पर दबाव बनाने की अपील