Vibrant Villages Program: भारत-चीन सीमा पर अब सिर्फ सैनिकों की तैनाती ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांव भी देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास कई नए गांव बसाए हैं. इसे सीमा पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति माना जाता है.
अब भारत ने भी इसका जवाब 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के जरिए देना शुरू किया है. इस योजना का मकसद सिर्फ गांवों का विकास करना नहीं, बल्कि सीमावर्ती इलाकों को आबाद रखना और वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं देकर सीमा सुरक्षा को मजबूत करना भी है.
क्या है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम?
केंद्र सरकार ने सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' शुरू किया है. इसके तहत चीन सीमा से लगे गांवों में सड़क, बिजली, इंटरनेट, पर्यटन, रोजगार और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इस योजना में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के सीमावर्ती गांव शामिल हैं.
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत कुल 2,967 गांवों को शामिल किया गया है. पहले चरण में 662 गांव चुने गए, जिनमें सबसे ज्यादा 455 गांव अरुणाचल प्रदेश के हैं. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख के कई गांव भी इस योजना का हिस्सा हैं.
इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत-चीन सीमा करीब 3,488 किलोमीटर लंबी है. पिछले कुछ सालों में सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में शहरों की ओर जाने लगे थे. इससे कई गांव खाली होने लगे. सीमा पर आबादी कम होना सुरक्षा के लिहाज से चिंता की बात मानी जाती है.
सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग अक्सर सेना के लिए महत्वपूर्ण जानकारी का स्रोत बनते हैं. इलाके में होने वाली गतिविधियों पर उनकी नजर रहती है और जरूरत पड़ने पर वे सुरक्षा एजेंसियों को सूचना भी देते हैं. इसी वजह से सरकार ने फैसला किया कि गांवों में ही बेहतर सुविधाएं और रोजगार के मौके दिए जाएं, ताकि लोग वहीं रहकर अपना जीवन बिता सकें.
गांवों में क्या-क्या बदला जा रहा है?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं. गांवों को नई सड़कों से जोड़ा जा रहा है. नए घर और सरकारी इमारतें बनाई जा रही हैं. कई जगह सौर ऊर्जा की सुविधा दी जा रही है.
इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क को बेहतर बनाया जा रहा है. साथ ही कॉमन सर्विस सेंटर भी खोले जा रहे हैं. इसके अलावा पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को पहचान दिलाने पर भी काम हो रहा है.
युवाओं को मिल रहे रोजगार के मौके
सरकार युवाओं के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार की योजनाएं भी चला रही है. कृषि, बागवानी, औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों से जुड़े कामों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों की आय बढ़ सके और उन्हें अपने गांव छोड़कर बाहर न जाना पड़े.
सरकार ने कितना खर्च किया?
केंद्र सरकार ने 2022-23 से 2025-26 के बीच इस योजना पर करीब 4,800 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इनमें से लगभग 2,500 करोड़ रुपये सड़क निर्माण और बेहतर संपर्क व्यवस्था पर लगाए गए हैं. सरकार का मानना है कि मजबूत सीमावर्ती गांव सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का भी अहम हिस्सा हैं.
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