'उन्हें जो असल में सच्चा लगता वो उससे जुड़ जाते...' Gen-Z पर बोले मोहन भागवत, LGBTQ+ पर भी रखी अपनी राय

Mohan Bhagwat Statement: Gen-Z, LGBTQ+ और लिव-इन रिलेशनशिप पर संघ प्रमुख ने रखी बेबाक राय, कही कई अहम बातें

mohan-bhagwat-genz-lgbtq-livein-statement-rss-2026
Image Source: Internet

Mohan Bhagwat Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान समाज, युवा पीढ़ी और बदलती सामाजिक सोच से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी. उन्होंने Gen-Z की मानसिकता, LGBTQ समुदाय की सामाजिक स्वीकार्यता और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज को संवेदनशीलता, संतुलन और परंपराओं के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है.

हाल के दिनों में युवाओं से जुड़े कई सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर देशभर में चर्चा के बीच भागवत का यह बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील है, जबकि समाज को हर वर्ग के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव बनाए रखना चाहिए.

Gen-Z को लेकर क्या बोले मोहन भागवत?

संघ प्रमुख ने कहा कि आज की Gen-Z पीढ़ी स्वभाव से अच्छी, सहज और जल्दी घुल-मिल जाने वाली है. उनके अनुसार, यह पीढ़ी भावनात्मक रूप से अधिक प्रभावित होती है और कई बार किसी विषय पर गहराई से विचार करने के बजाय जो बात उन्हें पहली नजर में सही लगती है, उससे तुरंत जुड़ जाती है. उन्होंने कहा कि युवाओं की यही संवेदनशीलता उनकी ताकत भी है, लेकिन किसी भी मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले विवेकपूर्ण सोच भी उतनी ही जरूरी है.

LGBTQ समुदाय को बताया समाज का अभिन्न हिस्सा

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने LGBTQ समुदाय को लेकर भी स्पष्ट टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोग भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें सम्मान तथा बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए. किसी भी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी प्रवृत्तियां हमेशा से रही हैं. कुछ स्थितियां जन्मजात होती हैं और कुछ समय के साथ विकसित होती हैं. ऐसी परिस्थितियों को केवल किसी एक देश या समाज तक सीमित नहीं माना जा सकता.

भारतीय परंपरा में स्वीकार्यता का किया उल्लेख

भागवत ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं में विविधताओं को स्वीकार करने की परंपरा रही है. उनके अनुसार, जिन परिस्थितियों में बदलाव संभव नहीं है, उन लोगों को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को समाज से अलग करना उचित नहीं है. सामाजिक व्यवस्था में उनके लिए भी स्थान है और उनके प्रति संवेदनशील तथा सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय धार्मिक परंपराओं में ऐसे समुदायों की उपस्थिति लंबे समय से रही है.

समाज में संवेदनशील दृष्टिकोण की जरूरत

संघ प्रमुख ने कहा कि ऐसे विषयों पर अनावश्यक शोर-शराबा या टकराव की बजाय समझदारी और संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए. उनके अनुसार, समाज का उद्देश्य हर व्यक्ति को सम्मान देना होना चाहिए ताकि सभी लोग गरिमा के साथ जीवन जी सकें. उन्होंने कहा कि समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए विवेकपूर्ण व्यवस्था और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है.

लिव-इन रिलेशनशिप पर भी रखी अपनी राय

लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते चलन पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में विवाह के अलावा भी कुछ जीवन पद्धतियां रही हैं, लेकिन उनके लिए स्पष्ट अनुशासन और नियम निर्धारित किए गए थे. उन्होंने कहा कि ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारिणी, संन्यासी और संन्यासिनी के लिए अलग-अलग आचार संहिताएं बनाई गई थीं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता था. उनके अनुसार, ऐसे लोग सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर अनुशासित जीवन व्यतीत करते थे.

पश्चिमी प्रभाव पर जताई चिंता

अपने संबोधन के दौरान भागवत ने कहा कि आधुनिकता का अर्थ केवल पश्चिमी जीवनशैली अपनाना नहीं है. उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन बिना सोच-समझ के किसी भी सामाजिक प्रवृत्ति की नकल करना उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों में इसके सामाजिक प्रभाव देखने को मिले हैं. उनके अनुसार, आधुनिकता और सामाजिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है.

ये भी पढ़ें- 'बात सिर्फ PoK पर होगी...' राजनाथ सिंह की चेतावनी से बौखलाया पाकिस्तान, किया भारत पर दबाव बनाने की अपील