हर 30 मिनट में पूरे भारत की तस्वीर, चीन-पाक पर रहेगी नजर... ISRO की ‘तीसरी आंख’ क्यों है बेहद खास?

ISRO Satellite Launch: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो 4 सितंबर को एक खास मिशन लॉन्च करने जा रही है. इस मिशन के जरिए भारत का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.

ISRO new satellite GSLV-F17/EOS-05 monitor India space tensions China Pakistan to rise
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ISRO Satellite Launch: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो 4 सितंबर को एक खास मिशन लॉन्च करने जा रही है. इस मिशन के जरिए भारत का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. मिशन सफल रहा तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास इस तरह की तकनीक है.

इस सैटेलाइट को जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद यह सैटेलाइट पृथ्वी की तस्वीरें लेकर भारत को सीमाओं और देश के अलग-अलग हिस्सों पर नजर रखने में मदद करेगा.

कब और कहां होगा लॉन्च?

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक, जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च होगा. इसके लिए दूसरे लॉन्च पैड का इस्तेमाल किया जाएगा. जीएसएलवी-एफ17 की यह 19वीं उड़ान होगी. रॉकेट ईओएस-05 सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाएगा.

क्यों खास है ईओएस-05?

ईओएस-05, जिसे जीसैट-1ए के नाम से भी जाना जाता है, जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट होगा. इसका वजन करीब 2367 किलोग्राम है.

यह अंतरिक्ष से पृथ्वी की हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेगा. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से भारत पर लगातार नजर रख सकेगा.

हर 30 मिनट में पूरे भारत की तस्वीर

ईओएस-05 का मुख्य काम पृथ्वी की तस्वीरें लेना और निगरानी करना है. यह करीब हर 30 मिनट में पूरे भारत की तस्वीर ले सकेगा. वहीं किसी खास इलाके की तस्वीर जरूरत के हिसाब से करीब हर 5 मिनट में ली जा सकती है.

सैटेलाइट में हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं. इसमें मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग की सुविधा भी होगी. इसे करीब 10 साल तक काम करने के लिए तैयार किया गया है.

किन देशों के पास है ऐसी तकनीक?

अमेरिका, चीन, रूस, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कुछ देशों के पास पहले से जियो-इमेजिंग या जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट मौजूद हैं. इनका इस्तेमाल मौसम की जानकारी, पर्यावरण की निगरानी, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जाता है.

भारत को क्या फायदा होगा?

इस सैटेलाइट से भारत की सीमाओं की निगरानी और मजबूत होगी. एलएसी और एलओसी पर सैनिकों की गतिविधियों, सैन्य ढांचे और दूसरी हलचल पर नजर रखने में मदद मिल सकती है.

युद्ध या किसी बड़े संकट के समय किसी खास इलाके की तस्वीरें तेजी से हासिल की जा सकेंगी. इसके अलावा हिंद महासागर में जहाजों और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में भी यह सैटेलाइट उपयोगी होगा.

आपदा के समय भी इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग, बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं की निगरानी में ईओएस-05 अहम भूमिका निभा सकता है.

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