नई दिल्ली: भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए एफडीआई के नियमों को और आसान बनाने पर विचार कर रही है. सरकार का मकसद ज्यादा विदेशी कंपनियों और निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है. उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों से बातचीत कर रहा है. एक अधिकारी के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के नियमों में कुछ बदलाव करने पर गंभीरता से विचार चल रहा है.
अभी 74% तक विदेशी निवेश की अनुमति
मौजूदा नियमों के तहत रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक विदेशी निवेश अपने आप मंजूर हो सकता है. इसके लिए सरकार से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती. 74 प्रतिशत से ज्यादा निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी है. ऐसे मामलों में मंजूरी आमतौर पर तभी दी जाती है, जब निवेश के साथ भारत में नई और आधुनिक तकनीक आने की उम्मीद हो.
रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना भी जरूरी है. इसके अलावा कंपनियों को रक्षा मंत्रालय की ओर से तय नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है.
रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत के रक्षा उद्योग में करीब 3.23 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश आया है. सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश में रक्षा उत्पादन बढ़ाने और विदेशी कंपनियों को भारत में उत्पादन के लिए आकर्षित करने पर जोर दे रही है.
भारत का रक्षा बजट भी लगातार बढ़ा है. वर्ष 2013-14 में रक्षा बजट करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है.
2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य
भारत के रक्षा निर्यात में भी पिछले कुछ वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2013-14 में रक्षा निर्यात सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसमें निजी कंपनियों का योगदान 17,353 करोड़ रुपये यानी 45.16 प्रतिशत रहा. वहीं रक्षा क्षेत्र के सरकारी उपक्रमों ने 21,071 करोड़ रुपये यानी 54.84 प्रतिशत का निर्यात किया.
सरकार ने अब वर्ष 2029 तक रक्षा क्षेत्र में सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही रक्षा निर्यात को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये सालाना करने की तैयारी है. एफडीआई नियमों में संभावित ढील को भी इसी लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.