इजरायल का लेबनान पर भीषण हमला, 250 लोगो की मौत, ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज! क्या टूट गया सीजफायर?

पश्चिम एशिया में हाल ही में घोषित सीजफायर से जहां दुनिया को कुछ राहत मिली थी, वहीं अब हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं.

Israels fierce attack on Lebanon Iran closed Hormuz Is the ceasefire broken
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Israel Attack On Lebanon: पश्चिम एशिया में हाल ही में घोषित सीजफायर से जहां दुनिया को कुछ राहत मिली थी, वहीं अब हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच तय दो हफ्तों के युद्धविराम के कुछ ही समय बाद इजरायल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर दी. इस हमले ने पूरे क्षेत्र में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है.

लेबनान की राजधानी बेरूत में बुधवार को एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए, जिससे पूरा शहर दहल उठा. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आसमान में धुएं के बड़े गुबार उठते देखे गए और कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. इजरायली सेना का दावा है कि उसने बेहद कम समय में बड़ी संख्या में लक्ष्यों को निशाना बनाया. बताया गया कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों, कमांड सेंटर और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर की गई.

मौत और घायलों का आंकड़ा बढ़ा

लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसियों के अनुसार इस हमले में 250 से अधिक लोगों की जान गई, जबकि 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. राजधानी बेरूत में ही बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गईं. स्वास्थ्य विभाग ने भी मृतकों की संख्या की पुष्टि की है, हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि अंतिम आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है. अस्पतालों में घायल लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और कई जगह संसाधनों की कमी साफ दिखाई दी.

सीजफायर पर सवाल, हिजबुल्लाह का आरोप

यह हमला ऐसे समय हुआ जब हिजबुल्लाह ने कथित तौर पर युद्धविराम का पालन करते हुए अपने हमले रोक दिए थे. संगठन के एक वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि उन्हें यह बताया गया था कि लेबनान भी इस समझौते का हिस्सा है, लेकिन इजरायल ने इसे नजरअंदाज करते हुए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. उनके अनुसार यह हमला सीजफायर की भावना के खिलाफ है और इससे हालात और गंभीर हो सकते हैं.

इजरायल और अमेरिका का रुख स्पष्ट

इजरायल की ओर से साफ कहा गया है कि लेबनान इस युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है, इसलिए वहां सैन्य अभियान जारी रहेगा. अमेरिका की तरफ से भी इसी तरह का रुख सामने आया है. अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर कुछ भ्रम पैदा हुआ था, लेकिन लेबनान को इस सीजफायर में शामिल नहीं किया गया था.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और जमीनी हालात

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने इस हमले को बेहद चिंताजनक और भयावह बताया है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा, खासकर युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद, स्थिति को और जटिल बना देती है.

जमीन पर हालात बेहद गंभीर हैं. घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए साधनों की कमी पड़ गई, कई लोगों को मोटरसाइकिल के जरिए ले जाया गया. कुछ अस्पतालों ने सभी ब्लड ग्रुप के लिए तत्काल रक्तदान की अपील की है.

बुनियादी ढांचे को नुकसान

हमले में कई इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं. कुछ जगहों पर लोगों को मलबे से निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल करना पड़ा. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अब उन्हें हर समय हमले का डर सता रहा है.

इजरायल की कार्रवाई में दक्षिण लेबनान को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल भी नष्ट हो गया, जिससे वहां फंसे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. पहले से ही लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं.

राजनयिक कोशिशें तेज

लेबनान के राष्ट्रपति ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है. फ्रांस की ओर से भी स्थिति को संभालने के प्रयासों के संकेत मिले हैं, जिससे कूटनीतिक हल की उम्मीद बनी हुई है.

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

इसी बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि हमले नहीं रुके तो उसका जवाब गंभीर होगा. खबरों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर फिर असर पड़ा है. कुछ तेल टैंकरों के रुकने और जहाजों को सतर्क रहने के संदेश मिलने की जानकारी सामने आई है.

यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर डाल सकता है.